
New Delhi, 25 मई . India Government के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के अंतर्गत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने Monday को New Delhi के मानेकशॉ सेंटर में India के सबसे बड़े जैव चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुविधा कार्यक्रम ‘मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र: इनोवेटर्स-टू-इंडस्ट्री (आई2आई) कनेक्ट’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया.
इस आयोजन के साथ ही आईसीएमआर मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल के तहत जैव चिकित्सा नवाचार प्रदर्शन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए समर्पित देश के पहले संरचित प्लेटफार्मों में से एक की स्थापना हुई. इस पहल का उद्देश्य मजबूत उद्योग साझेदारी के माध्यम से स्वदेशी जैव चिकित्सा अनुसंधान को सुलभ, वास्तविक दुनिया के स्वास्थ्य सेवा समाधानों में परिवर्तित करना है.
इस कार्यक्रम का उद्घाटन आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने नीति संस्थान के सदस्य प्रोफेसर गोबरधन दास की उपस्थिति में किया.
मुख्य भाषण देते हुए राज्य मंत्री जाधव ने कहा कि यह पहल भारतीय विज्ञान को उद्योग से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हमारी प्रयोगशालाओं में विकसित नवाचार ऐसी प्रौद्योगिकियों में तब्दील हों जो जन स्वास्थ्य को मजबूत करें और विकसित India को आगे बढ़ाएं. India स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का उपभोक्ता होने से आगे बढ़कर किफायती और नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधानों का वैश्विक स्रोत बनने की ओर अग्रसर है, जो आईसीएमआर जैसे संस्थानों और मजबूत उद्योग साझेदारी द्वारा संचालित है.
इस अवसर पर बोलते हुए नीति आयोग के सदस्य डॉ. गोबरधन दास ने कहा कि India के पास स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने की वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है. मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र बौद्धिक संपदा की रक्षा करने, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाने और स्वदेशी नवाचारों को प्रयोगशालाओं से समाज तक पहुंचाने की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
आईसीएमआर के महानिदेशक और स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा कि मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र आईसीएमआर की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि अत्याधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर मजबूत उद्योग साझेदारी और प्रभावशाली प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से लोगों तक पहुंचे.
इस कार्यक्रम के दौरान, ‘इंडियन बायोमेडिकल पेटेंट लैंडस्केप रिपोर्ट’ और ‘टेक्नोलॉजी कंपेंडियम’ भी जारी किए गए, जो India के बायोमेडिकल नवाचार, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आईसीएमआर संस्थानों और नवप्रवर्तकों द्वारा उद्योग भागीदारों को 41 सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण था, ताकि उनका आगे विकास, उत्पादन और व्यावसायीकरण किया जा सके. इन प्रौद्योगिकियों में उन्नत निदान, टीके, चिकित्सा उपकरण और जैव चिकित्सा समाधान शामिल हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को संबोधित करते हैं. हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में टाइफाइड और पैराटाइफाइड के लिए ग्लाइकोकॉन्जुगेट और रिकॉम्बिनेंट टीके, साथ ही जापानी एन्सेफलाइटिस, तपेदिक और चेचक जैसी बीमारियों के लिए निदान प्रौद्योगिकियां शामिल थीं.
एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, निष्क्रिय केएफडी और चंदीपुरा वायरस सहित सुप्रसिद्ध जैव सामग्री को उद्योग भागीदारों को हस्तांतरित किया गया, जिससे India के जैव चिकित्सा अनुसंधान और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली. इस आयोजन में आईसीएमआर संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स द्वारा विकसित निदान, उपचार और चिकित्सा उपकरणों में 100 से अधिक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, साथ ही नवप्रवर्तकों और उद्योग हितधारकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाया गया.
नवप्रवर्तकों और उद्योग संपर्क पहल से मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के साथ विकसित India 2047 के लिए India के बायोमेडिकल क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है.
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एमएस/
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