
Patna, 16 जुलाई . जदयू नेता राजीव रंजन ने कई नेताओं के प्रशांत किशोर की पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के मामले सहित कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी है.
से बातचीत करते हुए राजीव रंजन ने कहा कि एक बात साफ है कि प्रशांत किशोर की भले ही सक्रियता है लेकिन भाजपा और एनडीए का भारी मतों से जीतना तय है. जनसुराज को जो लोग छोड़कर आए हैं, उनमें से दो लोग बांकीपुर के आसपास के निर्वाचन क्षेत्रों से उम्मीदवार थे. उन लोगों को इस बात का एहसास है कि प्रशांत किशोर जबरन फैसले थोपने के आदी हो चुके हैं और इस उपचुनाव में जनसुराज के भविष्य को दांव पर लगा दिया है.
आर्टिकल 370 पर कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज के बयानों पर राजीव रंजन ने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ सिर्फ नेतृत्व के सवाल पर ही बंटा हुआ नहीं है. इसमें शामिल पार्टियों की अहम मुद्दों पर प्राथमिकताएं भी अलग-अलग हैं. इस तरह के बयान गठबंधन के अंदर की बेचैनी और गहरे मतभेदों को उजागर करते हैं. जनता दल (यूनाइटेड) शुरू में आर्टिकल 370 को हटाने के खिलाफ थी. हालांकि, एनडीए Government द्वारा जम्मू-कश्मीर के विकास की रणनीति लागू करने के बाद, इस क्षेत्र में काफी तरक्की हुई है. आज पूरे जम्मू-कश्मीर में विकास हो रहा है, पारंपरिक शिल्प क्षेत्र की समृद्धि में योगदान दे रहे हैं, और दुनिया भर से पर्यटक इसकी प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने आ रहे हैं.
Patna एनकाउंटर मामले पर उन्होंने कहा, “वह आपराधिक बैकग्राउंड वाला व्यक्ति था और उस पर गंभीर आरोप थे. Patna Police बंटी यादव की बेरहमी से की गई हत्या के मामले में उसे मुख्य आरोपी मानती थी. उस घटना के बाद कई Police अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी. अगर अपराधी Police के अधिकार को चुनौती देने की कोशिश करते हैं या ड्यूटी के दौरान उन्हें सीमा पार करने के लिए मजबूर करते हैं, तो ऐसी स्थितियां पैदा होना स्वाभाविक हैं.”
पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह की खबरों पर उन्होंने कहा, “पंजाब के हालात को देखते हुए हमें जो समझ आता है, वह यह है कि Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर तब जागते हैं जब नुकसान हो चुका होता है. चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पूर्व Chief Minister रहे हैं और अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के वोटरों के बीच उन्हें काफी समर्थन हासिल है. वे बहुत लोकप्रिय नेता हैं. दूसरी ओर, उनके और कांग्रेस के मौजूदा राज्य नेतृत्व के बीच मतभेद रहे हैं, और भूपेश बघेल की बार-बार की कोशिशों को भी राज्य में कई लोगों ने स्वीकार नहीं किया है. राहुल गांधी को इन मुद्दों को सुलझाने में व्यक्तिगत रुचि लेनी चाहिए.”
ममता बनर्जी को लेकर उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी को अपना Political उत्तराधिकारी बनाने पर अड़ी रहती हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं की बात नहीं सुनती हैं, तो और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं. मदन मित्रा समेत कई नेता पहले भी पार्टी से दूर हो चुके हैं, और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जो अभी पार्टी में हैं, वे आगे भी बने रहेंगे. इससे पहले भी पार्टी के कुछ विधायक अलग हो चुके हैं और संसदीय दल में भी बड़ी फूट पड़ चुकी है.
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एसडी/पीएम
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