राहुल गांधी के बयान पर गरमाई सियासत, भाजपा नेताओं ने किया तीखा विरोध

चंडीगढ़/jaipur, 20 मई . Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा Prime Minister Narendra Modi, गृह मंत्री और आरएसएस को लेकर दिए गए बयान पर जमकर राजनीति हो रही है. भाजपा के तमाम नेताओं और मंत्रियों ने उनके बयान की निंदा की और माफी की मांग की है.

Haryana Government में मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी के बयान को लेकर कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह देश के सेवादार हैं. वे दिन-रात मेहनत करके इस देश को आगे लेकर जा रहे हैं. जब कांग्रेस की Government सत्ता से गई थी, तब देश की अर्थव्यवस्था 14वें नंबर पर थी और आज हम तीसरे नंबर पर हैं.

उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में हमारी Government के नेतृत्व में तरक्की हो रही है. आपको कम से कम जनता का फैसला मानना चाहिए. जनता आपको स्वीकार नहीं कर रही है. लगभग 95 चुनाव आप हार चुके हैं, जबकि भाजपा को जनता का समर्थन मिल रहा है और इसी वजह से 22 से ज्यादा राज्यों में भाजपा की Government है.

पीएम मोदी के विदेश दौरे पर उठाए गए सवाल पर अनिल विज ने कहा कि Prime Minister कहीं भी हों, वहीं से देश की देखरेख करते हैं. विदेश जाने से पहले वह सबको आगाह करके गए हैं, ठीक उसी तरह जैसे परिवार का मुखिया अपने परिवार को आगाह करता है.

अनिल विज ने कहा कि Prime Minister द्वारा विदेश यात्रा कम करने की अपील राहुल गांधी को ज्यादा बुरी लगी है, क्योंकि सबसे ज्यादा विदेश यात्राएं वही करते हैं. उन्हें आज तकलीफ इसलिए हो रही है क्योंकि पीएम मोदी इटली गए हैं. सभी देशों के साथ अच्छे संबंध बने हुए हैं, यही हमारी विदेश नीति है. पीएम मोदी देश के कामों के चलते विदेश यात्रा पर जाते हैं.

वहीं, Rajasthan भाजपा के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि यह कांग्रेस की हताशा की पराकाष्ठा है. देश ही नहीं, विदेशों में भी कई लोग यह समझने लगे हैं कि देश का विपक्ष हताश हो गया है. पीएम मोदी ने देश को समृद्ध बनाने में बड़ा योगदान दिया है. उन्होंने देश के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ी है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा ही नहीं है. आलोचना होनी चाहिए, हम आलोचना के लिए तैयार हैं. देश के अन्य दलों के नेता भी आलोचना करते हैं. देश की पूर्व Prime Minister इंदिरा गांधी ने भी कभी इस तरह की शब्दावली का इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन अब तो हद ही हो गई है. यह उचित नहीं है. ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाना चाहिए. हम अपने से नीचे के नेताओं को ठीक से बोलने और शब्दों के चयन को लेकर सलाह देते हैं, लेकिन देश के नेता प्रतिपक्ष इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

एएमटी/डीकेपी