मेसी इवेंट में मची अफरा-तफरी को लेकर पुलिस ने पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को जारी किया नया समन

कोलकाता, 5 जुलाई . अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनेल मेसी के ‘गोट इंडिया टूर’ इवेंट के दौरान कुप्रबंधन के मामले में पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को बिधाननगर साउथ Police स्टेशन ने फिर से समन भेजा है.

पूर्व खेल मंत्री को पहले भी कई बार बुलाया गया था और वे कई मौकों पर पेश होने से बचते रहे. हालांकि 18 जून को वे Police स्टेशन पहुंचे, जहां उनसे काफी देर तक पूछताछ की गई.

इस बार Police ने उन्हें 13 दिसंबर 2025 की घटना के बारे में पूछताछ के लिए फिर से नोटिस भेजा है.

उन्हें Tuesday (7 जुलाई) को सुबह 10 बजे पेश होने के लिए कहा गया है. अब यह देखना बाकी है कि क्या वे फिर से पेश होंगे या नहीं.

अरूप बिस्वास पर साल्ट लेक के युवा भारती क्रीड़ांगन में मेसी के इवेंट के दौरान हुई अव्यवस्था और अफरातफरी में भूमिका निभाने का आरोप है. इवेंट के मुख्य आयोजक शताद्रु दत्ता ने उनके खिलाफ First Information Report दर्ज कराई है.

उस मामले के आधार पर Police ने उनसे पूछताछ के लिए कई बार बुलाया. पूर्व मंत्री ने किसी भी सख्त कार्रवाई से सुरक्षा पाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट ने शुरू में उन्हें 2 जुलाई तक सुरक्षा दी थी. वे सुरक्षा मिलने के बाद ही 18 जून को Police के सामने पेश हुए.

इस बीच, शताद्रु दत्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की और सिंगल बेंच के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें अरूप बिस्वास को सुरक्षा दी गई थी, हालांकि डिवीजन बेंच ने शताद्रु दत्ता की आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और आखिरकार अरूप बिस्वास को सुरक्षा देने वाले सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा.

शताद्रु दत्ता, जिन्हें पिछले साल 13 दिसंबर को युवा भारती क्रीड़ांगन में हुई अव्यवस्था के बाद गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने कोलकाता में मेसी के दौरे के दौरान हुई अफरातफरी को लेकर अरूप बिस्वास पर कई आरोप लगाए हैं.

राज्य में Government बदलने के बाद उन्होंने इवेंट के दौरान सुरक्षा में हुई भारी चूक के लिए भी अरूप बिस्वास को जिम्मेदार ठहराया और बिधाननगर Police में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई.

शताद्रु ने दावा किया कि पिछले साल दिसंबर में युवा भारती स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मेसी के इवेंट के लिए कुल 70,000 टिकट छापे गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से तत्कालीन खेल मंत्री ने अपने रसूख और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अकेले 22,000 टिकट ले लिए थे. शताद्रु ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मंत्री ने वे टिकट अपने परिचितों में बांटे और उन्हें बेचा. इसके अलावा, उन्होंने कार्यक्रम में हुई सारी अव्यवस्था के लिए अरूप बिस्वास को दोषी ठहराया.

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