
नई दिल्ली, 9 अगस्त . रूसी विदेश मंत्रालय ने नागासाकी परमाणु बमबारी की 81वीं बरसी को लेकर जापान की Prime Minister सनाए तकाइची पर निशाना साधा. रूस ने कहा कि तकाइची के पास परमाणु बमबारी के गुहनगाहरों का नाम लेने का साहस नहीं है.
रूस की प्रमुख सरकारी समाचार ‘टास’ की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा है कि जापान की Prime Minister सनाए तकाइची में यह कहने का साहस नहीं है कि 81 साल पहले उनके देश पर परमाणु बम किसने गिराया था.
उन्होंने कहा कि नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने की 81वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक समारोह में बोलते हुए तकाइची ने यह नहीं बताया कि बम अमेरिका ने गिराया था.
प्रवक्ता जाखारोवा ने टेलीग्राम पर लिखा, “क्या जापान का मौजूदा नेतृत्व यह मानता है कि हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु यूएफओ गिरा गए थे? नागासाकी के मेयर शिरो सुजुकी में इतना साहस था कि उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बम एक ‘अमेरिकी सैन्य विमान’ की ओर से गिराया गया था.”
उन्होंने कहा कि इससे तीन दिन पहले, हिरोशिमा पर परमाणु बमबारी की वर्षगांठ पर आयोजित स्मृति समारोह में हिरोशिमा के मेयर काजुमी मात्सुई और Prime Minister तकाइची ने भी उस देश का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया था जिसने शहर पर परमाणु हमला किया था. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी अपने संदेश में अमेरिका का नाम नहीं लिया.
‘टास’ की रिपोर्ट के अनुसार, जाखारोवा की यह टिप्पणी जापान में आयोजित उन स्मृति कार्यक्रमों के बाद आई है, जिनमें परमाणु बमबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन बम गिराने वाले देश का नाम कई वक्ताओं की ओर से सीधे तौर पर नहीं लिया गया.
इससे पहले रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने भी परमाणु बम हमले की बरसी के मौके पर जापान की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि कितनी शर्म की बात है कि उस खौफनाक दौर को याद करते हुए भी जापान ने एक बार भी इसके पीछे के जिम्मेदारों का नाम तक नहीं लिया.
रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, ”हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु बम हमलों को याद करते समय जापान के Prime Minister या किसी अन्य जापानी अधिकारी ने एक बार भी यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि ये हमले किसने किए थे. यह वाकई शर्म की बात है.”
उन्होंने कहा कि जापान अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर है, और किसी समय वह एक ‘रोनिन’ की तरह हो जाएगा, यानी ऐसा व्यक्ति जो अपने संरक्षक या सहारे के बिना रह जाए.
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एवाई/डीकेपी
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