
New Delhi, 16 अप्रैल . संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान Lok Sabha में एक अहम विधायी मुकाबला देखने को मिल रहा है. सदन में मौजूद 333 सांसदों में से 207 ने विधेयक पेश करने के पक्ष में मतदान किया, जबकि 126 सांसदों ने इसका विरोध किया. इसके साथ ही सदन में उच्च दांव का Political टकराव शुरू हो गया है.
संविधान के अनुच्छेद 368 के अनुसार, किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ-साथ उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. विधेयक दोनों सदनों से पारित होने के बाद President की मंजूरी के लिए भेजा जाता है.
वर्तमान में Lok Sabha की प्रभावी सदस्य संख्या 540 है, क्योंकि तीन सीटें रिक्त हैं. ऐसे में यदि सभी सदस्य मतदान में भाग लेते हैं, तो विधेयक पारित करने के लिए कम से कम 360 मतों की आवश्यकता होगी.
सत्ता पक्ष राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास Lok Sabha में करीब 292 सीटें हैं, जिससे उसे साधारण बहुमत तो प्राप्त है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे अन्य दलों का समर्थन जुटाना होगा. वहीं विपक्षी इंडिया गठबंधन और उसके सहयोगियों के पास लगभग 229 सीटें हैं, जबकि अन्य दलों के पास 12 सीटें हैं. इसके अलावा सात निर्दलीय सांसद भी सदन में मौजूद हैं.
एनडीए में प्रमुख पार्टी भाजपा के पास 240 सीटें हैं, जबकि टीडीपी के 16 और जदयू के 12 सांसद हैं. विपक्षी खेमे में कांग्रेस के 98, Samajwadi Party के 37, टीएमसी के 28 और डीएमके के 22 सांसद हैं.
अन्य दलों में वाईएसआरसीपी, आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम शामिल हैं.
यह पूरा अंकगणित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जम्मू-कश्मीर कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर होने वाले मतदान को बेहद अहम बना देता है.
प्रस्तावित विधेयक के तहत Lok Sabha की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है. इसे 33 प्रतिशत महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जोड़ा गया है. हालांकि महिला आरक्षण कानून 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन परिसीमन की प्रक्रिया लंबित होने के कारण इसे अभी लागू नहीं किया गया है.
Government का उद्देश्य 2029 के Lok Sabha चुनाव से पहले इन प्रावधानों को लागू करना है. वहीं जम्मू-कश्मीर कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं के लिए प्रतिनिधित्व को स्पष्ट करने का प्रयास करता है.
परिसीमन विधेयक, 2026 के जरिए जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं फिर से निर्धारित की जाएंगी. पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी.
विपक्ष ने परिसीमन को संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है. खासतौर पर तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्यों ने आशंका जताई है कि इससे उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे हिंदीभाषी राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है.
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने स्तर पर सदन में रणनीति बनाने में जुटे हैं.
इस बीच, Prime Minister Narendra Modi ने सदन में महिला आरक्षण का जोरदार समर्थन करते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया. उन्होंने कहा, “जो लोग महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.” उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे को Political रंग न दें और मिलकर देश के लोकतंत्र को मजबूत करें.
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डीएससी
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