स्कूल-अस्पताल समेत सार्वजनिक इमारतों के लिए राष्ट्रीय फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क की मांग, याचिका दायर

New Delhi, 26 जून . Supreme Court में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है. इसमें देश भर में ज्‍यादा जोखिम वाली सार्वजनिक जगहों (जैसे स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग) के लिए ‘नेशनल मिनिमम फायर एंड लाइफ-सेफ्टी फ्रेमवर्क’ (राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि और जीवन सुरक्षा ढांचा) बनाने और लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है.

याचिका में स्कूलों, अस्पतालों, कोचिंग सेंटरों, होटलों और कमर्शियल जगहों पर बार-बार होने वाली आग की घटनाओं का हवाला दिया गया है.

वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने अपनी तरफ से यह रिट याचिका दायर की है. इसमें केंद्र और राज्य Governmentों से सार्वजनिक इमारतों के लिए एक जैसे न्यूनतम फायर और लाइफ-सेफ्टी स्टैंडर्ड तय करने के निर्देश देने की मांग की गई है, चाहे अलग-अलग राज्यों में मौजूदा नियम-कानून कैसे भी हों.

याचिका में कहा गया है कि फायर सेफ्टी से जुड़े मौजूदा नियम अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अलग-अलग और असमान हैं. इससे स्टैंडर्ड में अंतर आता है और नियमों को लागू करने में कमियां रह जाती हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा को खतरा बना रहता है.

पीआईएल में एक ‘नेशनल मिनिमम फायर एंड लाइफ-सेफ्टी फ्रेमवर्क’ बनाने और लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है. इसमें स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल, गेस्ट हाउस, मनोरंजन स्थल, कमर्शियल बिल्डिंग और लोगों के आने-जाने वाली अन्य जगहें शामिल हों.

इसमें फायर सेफ्टी नियमों का पालन सुनिश्चित करने, समय-समय पर जांच करने, आपातकालीन तैयारी, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना और नियमों के उल्लंघन पर अधिकारियों व जगह के मालिकों की जवाबदेही तय करने के लिए असरदार तरीके अपनाने की मांग की गई है.

देशभर में आग की कई घटनाओं का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया है कि यह याचिका इसलिए जरूरी हो गई क्योंकि बार-बार होने वाली घटनाएं आग से बचाव, नियमों को लागू करने और लोगों की सुरक्षा में सिस्टम की कमियों को उजागर करती हैं, जबकि कई कानूनी प्रावधान और अदालती निर्देश पहले से मौजूद हैं.

याचिका में कई बड़ी घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिनमें उपहार सिनेमा में आग, एएमआरआई अस्पताल में आग, सूरत के तक्षशिला आर्केड कोचिंग सेंटर में आग, अनाज मंडी में आग, राजकोट टीआरपी गेम जोन में आग, हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर गेस्ट हाउस में आग और Lucknow के अलीगंज कोचिंग सेंटर में आग जैसी घटनाएं शामिल हैं.

याचिका में कहा गया है, “भयानक आग की घटनाओं का बार-बार होना सिस्टम की रेगुलेटरी (नियमन) विफलता, बिखरे हुए कानूनी स्टैंडर्ड और नियमों को लागू करने के अपर्याप्त तरीकों को दिखाता है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लगातार खतरा बना रहता है.”

पीआईएल में कहा गया है कि यह मामला कानून से जुड़े अहम सवाल उठाता है. ये सवाल अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों को लागू करने और सार्वजनिक जगहों पर उचित सुरक्षा स्टैंडर्ड सुनिश्चित करने की अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़े हैं.

इसमें Supreme Court के पिछले फैसलों का भी सहारा लिया गया है, जिनमें स्कूलों में आग से सुरक्षा से जुड़ा ‘अविनाश मेहरोत्रा ​​बनाम India संघ’ मामला और अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं पर Supreme Court की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही शामिल है. इसके अलावा, नेशनल बिल्डिंग कोड, मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज, एनडीएमए गाइडलाइंस और मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 का भी जिक्र किया गया है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि 24 जून को केंद्र और राज्य अधिकारियों को एक आवेदन दिया गया था, जिसमें आग और जीवन-सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय न्यूनतम ढांचा बनाने और उसे लागू करने की मांग की गई थी, लेकिन इस पर कोई असरदार कार्रवाई नहीं की गई.

एएसएच/पीएम