गंभीर संक्रमण से पीड़ित लोगों को पड़ सकती है बूस्टर शॉट की जरूरत

 

नई दिल्ली (New Delhi) . कोरोना (Corona virus) टीकाकरण के बाद भी भारत को कोविड बूस्टर शॉट की अचानक से जरूरत पड़ सकती है, लेकिन ये तात्कालिक और अर्जेंट जरूरत नहीं है. ये बातें इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटेड बायोलॉजी के डायरेक्टर डॉ अनुराग अग्रवाल ने कही हैं. डॉ अग्रवाल के मुताबिक वैक्सीन की दो डोज और बूस्टर शॉट के मुकाबले कोरोना संक्रमण और वैक्सीन की खुराकों से ज्यादा मजबूत इम्युन सिस्टम पैदा होने की उम्मीद है. आईजीबीआई, साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च काउंसिल के तहत आने वाला संस्थान है, जो कोरोना (Corona virus) की सीक्वेंसिंग का काम कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वायरस के नए वेरिएंट कैसे काम करते हैं. उन्होंने कहा, ‘वैक्सीन की दो डोज और बूस्टर शॉट के मुकाबले कोरोना (Corona virus) संक्रमण और वैक्सीन की दो डोज ज्यादा बढ़िया और मजबूत इम्युनिटी पैदा कर सकती हैं. यहां तक संक्रमण और वैक्सीन की एक डोज भी ज्यादा बढ़िया सुरक्षा प्रदान कर सकती है. ऐसे में भारतीयों की एक बड़ी संख्या को अभी बूस्टर शॉट की जरूरत नहीं है.’ डॉ अग्रवाल ने कहा कि जून 2021 में आईसीएमआर के सर्वे में 60 फीसदी से ज्यादा सीरो पॉजिटिविटी मिली थी.’

हालांकि डॉ अग्रवाल ने कहा कि हाई रिस्क या गंभीर संक्रमण से पीड़ित लोगों को बूस्टर शॉट की आवश्यकता पड़ सकती है. उन्होंने कहा, ‘हमें लोगों में संक्रमण की ताजा स्थिति की सटीक जानकारी नहीं है. ऐसे में ये ज्यादा व्यावहारिक होगा कि गंभीर या हाई रिस्क वाले समूह को वैक्सीन की बूस्टर शॉट दी जाए’. उन्होंने कहा कि बूस्टर शॉट की आवश्यकता स्वास्थ्य कर्मियों और हाई रिस्क वाले लोगों को पड़ सकती है. इनमें बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों वाले लोग भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस बारे में प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन अभी तक कोई कंक्रीट प्लान नहीं बना है. डॉ अग्रवाल ने कहा, ‘एक साक्ष्य आधारित योजना के लिए काफी काम किया जाना बाकी है. इस बारे में अभी काफी काम चल रहा है.’ उन्होंने कहा कि हम इस तथ्य को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि संक्रमण के खिलाफ प्राकृतिक इम्युनिटी या वैक्सीन जनित इम्युनिटी में कब गिरावट आनी शुरू हो रही है. साथ ही इस बात पर भी विचार चल रहा है कि क्या दो वैक्सीन का मिश्रण ज्यादा समय तक मजबूत इम्युनिटी प्रदान कर सकता है.’ डॉ अग्रवाल ने कहा कि कोरोना (Corona virus) संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने चेताते हुए कहा कि आने महीनों में फिर से संक्रमण बढ़ने का खतरा है. त्यौहार का समय चल रहा है और अगर लोगों ने सावधानियां नहीं बरतीं या भीड़ पर नियंत्रण नहीं स्थापित किया गया तो फिर संक्रमण बढ़ सकता है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि त्यौहारी सीजन के चलते बड़े पैमाने पर तीसरी लहर का खतरा नहीं है, क्योंकि ये वायरस के नए वैरिएंट्स पर निर्भर करता है, जो लोगों में मौजूद इम्युनिटी को गच्चा दे सकता है. उन्होंने कहा कि इनसाकोग की सीक्वेंसिंग में वायरस का कोई नया वैरिएंट सामने नहीं आया है, लेकिन अगले कुछ महीनों में स्थिति बदल भी सकती है. इनसाकोग मतलब इंडियन सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम- यह एक मल्टी लैबोरेट्री, मल्टी एजेंसी है, जिसका नेटवर्क पूरे भारत में है और यह कोरोना (Corona virus) के नए वैरिएंट्स पर नजर रखती है. वायरस की सीक्वेंसिंग करके नए वैरिएंट्स की पहचान करती है.

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