यौन शक्ति बढ़ाने गधे का मांस खा रहे लोग !

हैदराबाद . देश में गधों को विलुप्त होने वाले जानवरों की सूची में रखा गया है. अगर जल्द ही गधों की जनसंख्या में बढ़ोतरी नहीं हुई तो कई राज्य से यह जानवर पूरी तरह से गायब हो सकता है. भारत में गधों के मांस का उपयोग कई लोग खाने के लिए करते हैं. आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)में गधों के मांस को लेकर कई धारणाएं हैं! यहां के लोगों को लगता है कि गधे का मांस कई समस्याओं को दूर कर सकता है! वे मानते हैं कि गधे का मांस खाने से सांस की समस्या दूर हो सकती है!

उन्हें यह विश्वास भी है कि गधे का मांस खाने से यौन क्षमता भी बढ़ती है. इन धारणाओं की वजह से लोग गधे के मांस का इस्तेमाल भोजन के तौर पर कर रहे हैं. आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)के पश्चिम गोदावरी समेत कई जिलों में गधों को मारा जा रहा है. इनमें कृष्णा, प्रकाशम और गुंटूर समेत कई दूसरे इलाके शामिल हैं. यहां उनके मांस की खपत बहुत तेजी से बढ़ी है. भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई के मुताबिक, गधे ‘फूड एनीमल’ के तौर पर रजिस्टर्ड नहीं हैं.

इन्हें मारना अवैध है. आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)में गधे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं. यहां पर गधों को मारकर उनके अवशेषों को नहरों में फेंका जा रहा है. इससे लोगों के स्वास्थ्य को लेकर खतरा पैदा हो गया है. बाजार में गधों का मांस करीब 600 रुपए किलो बिक रहा है. मीट बेचने वाले एक गधा खरीदने के लिए 15 से 20 हजार रुपये तक दे रहे हैं. ऐसे में मांस के लिए गधों को अंधाधुंध काटा जा रहा है. इस पर रोक लगाना राज्य सरकार (State government) के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है.

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