
New Delhi, 21 जून . पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई अनिश्चितताओं के बीच, देश में बदलती आर्थिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए संसदीय वित्त समिति जल्द ही बैठक करेगी.
समिति के चेयरमैन भर्तृहरि महताब ने कहा, “गंभीर चुनौतियों के बावजूद, India की अर्थव्यवस्था मजबूती से उभर रही है. कुछ बहुत अच्छे संकेत भी हैं, जैसे कि पिछले साल की तुलना में परिवारों की बचत में भी बढ़ोतरी हुई है.”
उन्होंने कहा कि चुनौती यह है कि आर्थिक विकास दर को बढ़ाने के लिए सरकारी निवेश तो बढ़ रहा है, लेकिन निजी निवेश में तेजी नहीं आ रही है.
समिति ने इस महीने के तीसरे हफ्ते के आस-पास फिर से बैठक करने का फैसला किया है और Government के लिए सुझावों के साथ एक रिपोर्ट भी तैयार करेगी.
Lok Sabha बुलेटिन के अनुसार, वित्त मामलों की स्थायी समिति ने 2025-26 के दौरान विस्तार से जांच के लिए “देश में बदलती आर्थिक स्थितियां” को एक अतिरिक्त विषय के तौर पर चुना है.
संसदीय समितियां गठन के तुरंत बाद चर्चा के लिए विषय चुनती हैं, लेकिन उन्हें बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त विषय चुनने की भी आजादी होती है.
इस अलावा, Friday को जारी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक के मिनट्स में बताया गया कि अर्थव्यवस्था के मजबूत आधार की वजह से India पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई दिक्कतों का सामना करने में सफल रहा है.
मौद्रिक नीति कमेटी (एमपीसी) के सदस्य नागेश कुमार ने कहा, “पिछले ज्यादातर आर्थिक संकटों (जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस, टेपर टैंट्रम या कोविड-19) के मुकाबले, पश्चिम एशिया संकट के समय भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यापक आधार कहीं अधिक मजबूत थे.”
उन्होंने कहा कि फरवरी के आखिर में टकराव शुरू होने से पहले, भारतीय अर्थव्यवस्था जबरदस्त ग्रोथ और बहुत कम महंगाई वाले ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ में थी. देश के पास लगभग 11 महीने के आयात को कवर करने वाला करीब 700 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बेहतर निर्यात स्थिति, साथ ही सर्विसेज के अच्छे निर्यात की वजह से चालू खाता घाटा भी ठीक-ठाक स्तर पर था. हालांकि 10 साल के औसत से 20 प्रतिशत अधिक पानी वाले बांधों के स्तर से मानसून में होने वाली संभावित कमी को कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, समय के साथ भारतीय खेती में मानसून के उतार-चढ़ाव से निपटने की क्षमता बढ़ी है और उस पर इसका असर कम हुआ है.
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एबीएस
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