
तेहरान, 25 मई . Pakistan के Prime Minister शहबाज शरीफ ने अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों को सकारात्मक बताया. Sunday को उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्य पूर्व में कई हफ्तों से जारी संघर्ष समाप्त होगा और इस्लामाबाद में बहुत जल्द दूसरे दौर की शांति वार्ता हो सकती है. इसके उलट ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि फिलहाल तेहरान की ऐसी कोई योजना नहीं है.
बाघेई Monday को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बातें कह रहे थे. उन्होंने इस्लामाबाद टॉक्स को लेकर पूछे सवाल के जवाब में कहा, ” वर्तमान में ईरान की Pakistan यात्रा या Pakistanी अधिकारियों के तेहरान दौरे की कोई आधिकारिक योजना नहीं है.”
अमेरिका की ओर से बातचीत में प्रगति के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सामने आए घटनाक्रम Pakistan की मध्यस्थता में कई सप्ताह से चल रही वार्ताओं का परिणाम हैं. यह सही है कि चर्चा के तहत कई मुद्दों पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है, लेकिन फिलहाल कोई भी यह दावा नहीं कर सकता कि किसी समझौते पर हस्ताक्षर जल्द होने वाले हैं.
बाघेई ने यह भी कहा कि अमेरिका का Political व्यवहार हाल के समय में कुछ हद तक असंगत और अनिश्चित दिखाई दिया है.
इस्लामाबाद टॉक्स के तहत Pakistan की राजधानी में पहले दौर की बातचीत 11-12 अप्रैल को हुई थी. ईरानी प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची शामिल थे, जबकि अमेरिकी पक्ष की अगुवाई जेडी वेंस ने की थी. यह बैठक तनाव कम करने और संघर्ष विराम पर केंद्रित थी, लेकिन यह विफल रही. इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता की कोशिशें शुरू हुईं लेकिन तब से अब तक आमने-सामने की सीधी बातचीत नहीं हुई.
इस बीच India दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कुछ ऐसा कहा है जो उसकी कलई खोलता है. उन्होंने कहा कि Pakistan से आर्म्ड आतंकवाद India में भेजा जा रहा है जो आम लोगों को निशाना बनाया जाता है.
रूबियो से पूछा गया कि क्या India ने अमेरिका-ईरान संघर्ष में Pakistan की मध्यस्थ भूमिका को लेकर कोई आपत्ति जताई है? तो उन्होंने कहा कि India ने Pakistan की मध्यस्थता का कोई मुद्दा नहीं उठाया है और न ही कोई फिक्र जाहिर की है. लेकिन India हमेशा इस बात पर जोर देता है कि Pakistanी क्षेत्र से सशस्त्र आतंकवादी समूह सक्रिय हैं जो India को निशाना बनाते हैं और यह जाहिर भी है. अमेरिका हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ रहा है और आगे भी रहेगा.
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केआर/
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