इस्लामाबाद, 1 अप्रैल . पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी को बड़ी राहत देते हुए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) ने तोशाखाना मामले में उनकी 14 साल की सजा निलंबित कर दी है.

इमरान खान और बुशरा बीबी को तोशाखाना मामले में दोषी पाया गया था. यह मामला पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी द्वारा उनके कार्यकाल के दौरान विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्राप्त उपहारों के दुरुपयोग और अवैध तरीकों से उपहार प्राप्त करने से संबंधित था.

आम चुनाव से कुछ दिन पहले इस मामले में इमरान खान को सजा सुनाई गई थी, जिसे जल्दबाजी में की गई कार्रवाई और इमरान खान का सलाखों के पीछे रहना सुनिश्चित करने के लिए जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया जा रहा था.

शुरुआत में जवाबदेही अदालत ने 31 जनवरी को फैसला सुनाया था, जिसे बाद में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) में चुनौती दी गई, जिसने अब सजा को निलंबित कर दिया है और दंपति को जमानत पर रिहा करने की अनुमति दी है.

इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) में कार्यवाही के दौरान, अदालत ने जवाबदेही अदालत के 31 जनवरी 2024 के फैसले के खिलाफ इमरान खान के वकील की अपील पर सुनवाई की, जिसमें इमरान खान और उनकी पत्नी को देश के उपहार भंडार का दुरुपयोग करने का दोषी पाया गया और सजा सुनाई गई थी. इमरान खान और उनकी पत्नी को 14 साल की कैद के अलावा प्रत्येक आरोपी पर 78.7 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया.

आईएचसी की खंडपीठ, जिसमें आईएचसी के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियां गुल हसन औरंगजेब शामिल थे, ने सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई की.

बैरिस्टर अली जफर ने इमरान खान का प्रतिनिधित्व किया जबकि एनएबी अभियोजक अमजद परवेज़ ने राष्ट्रीय जवाबदेही बोर्ड (एनएबी) का प्रतिनिधित्व किया.

इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के लिए राहत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) समर्थकों और अनुयायियों के लिए एक बड़ी सफलता है, जो विरोध-प्रदर्शन और रैलियां कर रहे हैं और अपने नेता की रिहाई के लिए सोशल मीडिया अभियान चला रहे हैं. उनका कहना है कि खान को अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों के खिलाफ खड़े होने के लिए दंडित किया जा रहा है और देश की राजनीति में उनके हस्तक्षेप के लिए देश के शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान को दोषी ठहराने के इरादे से झूठे, फर्जी और मनगढ़ंत मामलों में सलाखों के पीछे डाल दिया गया है.

रावलपिंडी की अदियाला जेल से पत्रकारों से बात करते हुए इमरान खान ने कहा कि उनका संघर्ष दशकों से केवल कानून के शासन और जवाबदेही के लिए रहा है.

उन्होंने कहा कि यह शक्तिशाली प्रतिष्ठान है जो फैसले ले रहा है और उनकी आवाज बंद करने की कोशिश कर रहा है.

खान ने कहा कि न्यायाधीशों के पत्र की गहन जांच की जानी चाहिए और गंभीर आरोपों पर पक्षकार बनाए गए सभी पक्षों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.

पीटीआई समर्थकों का कहना है कि आईएचसी के फैसले से साबित होता है कि इमरान खान के खिलाफ मामलों का कोई आधार या कानूनी औचित्य नहीं है. इमरान खान उनके नेता हैं और शक्तिशाली राजनीतिक विरोधियों, सैन्य प्रतिष्ठान तथा वैश्विक शक्तियों के खिलाफ अपनी सच्चाई और साहसिक रुख के लिए देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक रहे हैं.

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