पीओजेके में लंबे समय से पाकिस्तानी सेना का दबदबा, स्थानीय लोगों का दमन जारी : फारूक वानी

श्रीनगर, 11 जून . Pakistan के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में हाल ही में भारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और गोलीबारी में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. श्रीनगर में से बातचीत के दौरान Political विश्लेषक फारूक वानी ने इस घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया.

उन्होंने कहा, “बॉर्डर के उस पार का इलाका, जिसे हम हमारा क्षेत्र मानते हैं, वहां हालात बेहद खराब हैं.” वानी ने आरोप लगाया कि Pakistan की सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जो मानवाधिकारों के खिलाफ है. इसमें 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है तथा 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि पीओजेके में लंबे समय से सैन्य और अर्धसैनिक बलों का दबदबा रहा है और स्थानीय लोगों को अपनी मांगें रखने के बावजूद गंभीर दमन का सामना करना पड़ता है. यह स्थिति न केवल Political बल्कि मानवीय संकट भी है.

उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने बुनियादी अधिकारों और आर्थिक राहत की मांग कर रहे थे, लेकिन हिंसा के कारण हालात और बिगड़ गए. वानी ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के लोग India के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं और इस मुद्दे पर लंबे समय से अलग-अलग स्तरों पर चर्चा होती रही है.

उन्होंने कहा, “जब से Pakistan बना है, तब से आर्मी ने पीओजेके में हमेशा अपना दबदबा बनाए रखा है. लेकिन, आज उन्होंने हमारे ही लोगों को मारकर और घायल करके सारी हदें पार कर दीं, जबकि वे सिर्फ अपने हक मांग रहे थे. हमने हमेशा कहा है कि इस इलाके को हमारे इलाके में मिला देना चाहिए. हमने दिल्ली और कश्मीर दोनों जगह कई बार कहा है कि पीओजेके एक कब्जा किया हुआ इलाका है, जिसे Pakistan ने जबरदस्ती अपने कब्जे में ले लिया है. देर-सवेर, Pakistan को हर हाल में इसे छोड़ना ही होगा.”

उन्होंने कहा कि अगर हम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बात करें तो उस समय भी हमला हुआ था. हो सकता है कि तब कुछ कमियां रही हों, लेकिन आखिर में Pakistan को यह इलाका खाली करना ही होगा. यह हमारा इलाका है और इसे हमारे साथ फिर से मिला देना चाहिए. वहां के लोग हमारी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को शेयर करते हैं. अगर हमारे ही लोगों पर जुल्म जारी रहा, तो यह हम सभी के लिए बहुत बुरा होगा.

उन्होंने कहा कि Prime Minister मोदी का 12 साल का कार्यकाल शानदार रहा है. वह एक ऐसे लीडर हैं, जिन्हें लगातार पब्लिक का सपोर्ट और भरोसा मिला है. लोग उन पर भरोसा करते हैं और उन्हें बार-बार मैंडेट दिया है, जिससे वह बार-बार प्राइम मिनिस्टर बन पाए हैं. उनकी लीडरशिप में देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका कद काफी बढ़ा है, और दुनिया भर में India की इमेज और मजबूत और असरदार हुई है. उन्होंने दुनिया भर में India की पहचान बनाई है, और उनकी विदेश नीति तारीफ के काबिल है.

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के प्रांतीय सचिव शफकत मीर ने भी दुख और चिंता व्यक्त की. उन्होंने इसे एक गंभीर मानवीय मुद्दा बताते हुए कहा कि निहत्थे नागरिकों पर की गई हिंसा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती. पीओजेके में स्थानीय लोग लगातार कठिनाइयों और दमन का सामना कर रहे हैं. यह घटना मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती है और इसके खिलाफ सभी को आवाज उठानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.

मीर ने India और Pakistan के प्रशासनिक दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय सुरक्षा बल आमतौर पर आपदा या संकट की स्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए आगे आते हैं, जबकि पीओजेके में स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है. उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.

पीआईएम/एबीएम