‘पाकिस्तानी सेना ने दिए कश्मीरियों को हथियार’, पीओजेके में पाकिस्तान का विरोध

New Delhi, 2 जुलाई . Pakistan के कब्जे वाले कश्मीर से अब Pakistan और Pakistanी सेना के खिलाफ आवाज उठने लगी है. यहां लोग मान रहे हैं कि कश्मीर में युवाओं को हथियार देने का काम Pakistan की सेना ने किया था. यहां चेतावनी दी गई कि अगर Pakistan उनकी बात नहीं सुनता है तो यह आंदोलन Pakistan से पीओजेके खाली कराने की मांग की दिशा में आगे बढ़ सकता है.

दरअसल, Pakistan के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में इन दिनों एक जनआंदोलन चल रहा है. इस जन आंदोलन के 24वें दिन एक विशाल जनसभा आयोजित की गई. इस जनसभा में Pakistan की सेना और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. रावलाकोट के ईदगाह मैदान में आयोजित इस सभा में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि जिन कश्मीरियों को आज आतंकवादी कहा जा रहा है, उन्हें हथियार देने का काम स्वयं Pakistan की सेना ने किया था.

करीब 80 हजार लोगों की मौजूदगी में अमन खान ने कहा, “Pakistan सेना ने खुद कश्मीरियों को बंदूकें दी थीं, और आज वही हमें आतंकवादी कह रही है.” उनके इस बयान पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों और नारों के साथ समर्थन जताया. यहां अपने संबोधन में अमन खान ने Pakistan प्रशासन और आतंकवादी संगठनों के बीच कथित संबंधों का भी आरोप लगाया.

उन्होंने दावा किया कि 5 फरवरी 2025 को रावलाकोट में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रशासन ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद को खुली छूट दी थी. उनके अनुसार, उस समय प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति देने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध कराई थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के हथियारबंद लोग एके-47 राइफलों और तलवारों के साथ शहर में खुलेआम मार्च कर रहे थे. इस सभा के दौरान अमन खान के लगभग हर बयान व Pakistanी सेना पर लगाए गए आरोप पर लोगों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी. ईदगाह मैदान तालियों, नारों और Pakistan Government के खिलाफ आवाजों से गूंजता रहा.

आंदोलनकारी नेताओं ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष का स्पष्ट संकेत बताया. सभा के अंत में जेएएसी नेतृत्व ने Pakistan Government को चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलन की 38 मांगों को बातचीत के जरिए स्वीकार कर लागू किया जाए. अन्यथा हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करेंगे.

नेताओं ने कहा कि यदि यह मार्च शुरू होता है तो आंदोलन का एजेंडा केवल 38 मांगों तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि तब आंदोलन Pakistan से पीओजेके खाली करने की मांग की दिशा में आगे बढ़ सकता है. लगातार 24 दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल आर्थिक और प्रशासनिक मुद्दों तक सीमित नहीं दिख रहा है.

रावलाकोट में हुई विशाल सभा ने संकेत दिया है कि आंदोलन धीरे-धीरे Political स्वरूप ले रहा है और Pakistan Government पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

जीसीबी/एमएस