
New Delhi, 15 जुलाई . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व Union Minister पी. चिदंबरम ने Wednesday को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को संसद के आगामी मानसून सत्र में पारित कराने के लिए डीएमके और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, डीएमके ने भाजपा को समर्थन देने की संभावना से साफ इनकार कर दिया, जबकि भाजपा ने चिदंबरम के आरोपों को खारिज कर पलटवार किया.
पी. चिदंबरम ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि भाजपा आगामी मानसून सत्र में 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक दिखावे के लिए Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की बात करता है, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य परिसीमन और संभावित रूप से निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन (गैरिमैंडरिंग) का रास्ता साफ करना है.
उन्होंने कहा कि महिलाओं को Lok Sabha और विधानसभाओं में आरक्षण देने के लिए पहले ही 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के जरिए संविधान में संशोधन किया जा चुका है. ऐसे में महिला आरक्षण के लिए नए विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं है.
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस में विभाजन के बाद अब भाजपा कथित तौर पर एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और डीएमके को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है, ताकि नए विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटाया जा सके.
उन्होंने कहा कि डीएमके और एनसीपी-एसपी पहले भी इस विधेयक के वास्तविक उद्देश्य को समझ चुकी हैं और उम्मीद है कि वे भविष्य में भी अपने रुख पर कायम रहेंगी. उन्होंने दोनों दलों को आगाह करते हुए कहा कि यदि वे परिसीमन के उद्देश्य वाले किसी नए विधेयक का समर्थन करते हैं, तो यह उनके अपने सिद्धांतों से समझौता होगा.
चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके के प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा का समर्थन नहीं करेगी.
उन्होंने कहा, “भाजपा हमसे समर्थन मांग सकती है, लेकिन डीएमके उसे किसी भी तरह का समर्थन नहीं देगी.”
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि उनके पास कोई दूसरा काम नहीं बचा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता दूसरे दलों को सलाह देने में लगे हैं, जबकि पहले कांग्रेस को अपनी स्थिति सुधारनी चाहिए.
रोहन गुप्ता ने कहा, “जब कांग्रेस के पास डीएमके का साथ देने का मौका था, तब उसने उसे निराश किया. अब वह दूसरे दलों को बता रही है कि उन्हें क्या करना चाहिए. आखिर कोई भी दल कांग्रेस पर भरोसा क्यों करेगा? इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी समझ चुके हैं कि कांग्रेस अपने हितों के लिए कभी भी साथ छोड़ सकती है.”
भाजपा प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भी चिदंबरम के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या एनसीपी या डीएमके ने चिदंबरम से सलाह मांगी थी?” उन्होंने आरोप लगाया कि चिदंबरम की समस्या यह है कि देश की महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिलना चाहिए.
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डीएससी
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