यूपी मानसून सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग पर अड़ा विपक्ष, कहा- सरकार की मुद्दों से भागने की कोशिश

Lucknow, 3 अगस्त . उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र Monday से शुरू हो गया, लेकिन इसकी अवधि को लेकर लगातार सियासी घमासान जारी है. 3 से 6 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस चार दिवसीय सत्र पर विपक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया और Government से इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की. विपक्ष का कहना है कि प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा के लिए चार दिन का समय पर्याप्त नहीं है. वहीं, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि पिछले कई वर्षों से अनुपूरक बजट वाला सत्र इसी अवधि का होता आया है और सभी दलों को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने Government से सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की. उनका कहना है कि इतने कम समय में जनता से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीर चर्चा संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधानसभा जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है और Government को पर्याप्त समय देना चाहिए.

Samajwadi Party के विधायक तूफानी सरोज ने कहा कि सदन में Government को घेरने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन सत्र का समय बेहद कम रखा गया है. उन्होंने कहा कि दान राशि में कथित हेराफेरी, पेपर लीक, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, बिजली संकट और खराब ट्रांसफार्मरों जैसे मुद्दों पर जनता जवाब चाहती है. कई इलाकों में ट्रांसफार्मर जलने के बाद 10 से 15 दिनों तक नहीं बदले जा रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है.

सपा विधायक संदीप सिंह पटेल ने भी Government पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सत्र केवल औपचारिकता बनकर रह गया है. प्रदेश का किसान खाद के लिए परेशान है, युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं और राज्य कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है और Government नहीं चाहती कि इन मुद्दों पर सदन में खुलकर बहस हो.

वहीं, Samajwadi Party के विधायक कमाल अख्तर ने कहा कि भाजपा Government किसानों, युवाओं, पेपर लीक, कानून-व्यवस्था, महंगाई और आरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहती है. उनका कहना है कि सीमित अवधि का सत्र विपक्ष की आवाज को कमजोर करने की कोशिश है.

हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने से बातचीत के दौरान विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि पिछले 25 से 30 वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो अनुपूरक बजट वाले सत्र की अवधि लगभग इतनी ही रही है. उन्होंने कहा कि इस बार कोई असामान्य स्थिति नहीं है.

महाना ने कहा, “विपक्ष को नियमों के दायरे में रहकर अपनी बात रखने और किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने की आजादी है. उन्हें बोलने का पूरा मौका दिया जाएगा. हालाँकि, हंगामा करने या ऐसा व्यवहार करने से बचना चाहिए जिसे जनता पसंद न करे और जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनुचित हो. उन्हें तय नियमों के तहत अपनी बात रखनी चाहिए, और मैं उन्हें बोलने का पूरा मौका दूंगा.”

बता दें कि सत्र के पहले दिन की कार्यवाही मौजूदा और पूर्व विधायकों के निधन पर शोक व्यक्त करने के साथ शुरू हुई. सदन ने दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसके बाद कार्यवाही Tuesday सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

पीआईएम/पीएम