
देहरादून, 19 जुलाई . उत्तराखंड प्रशासन ने ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के तहत केदारनाथ धाम में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है. इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है. इस अभियान के तहत, ‘संत’ बनकर श्रद्धालुओं को ठगने और उनका शोषण करने वालों की पहचान कर उन्हें वापस भेजा जा रहा है.
इस अभियान के दौरान कुल 15 ऐसे धोखेबाजों को चालान जारी किए गए हैं. अप्रैल में श्रद्धालुओं के लिए खोले गए केदारनाथ धाम में प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री भगवान शिव के दर्शन करने आ रहे हैं, जिससे वहां भारी भीड़ उमड़ रही है.
मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रशासन और Police ‘ऑपरेशन कालनेमी’ के तहत निरंतर सतर्कता बरत रहे हैं.
ऑपरेशन कालनेमी राज्य Government द्वारा जुलाई 2025 में शुरू किया गया एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान है, जिसका उद्देश्य हिंदू साधुओं का रूप धारण करके धोखाधड़ी करने, अवैध गतिविधियों में लिप्त होने और श्रद्धालुओं का शोषण करने वाले व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें गिरफ्तार करना है.
इस अभियान के तहत, बिना उचित Police सत्यापन या वैध पहचान दस्तावेजों के वहां रह रहे फर्जी बाबाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
केदारनाथ Police चौकी द्वारा यात्रा मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में एक विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया. धाम क्षेत्र में रह रहे साधुओं के पहचान पत्र और Police सत्यापन दस्तावेजों की जांच की गई.
निरीक्षण में पता चला कि कई व्यक्ति बिना Police सत्यापन के केदारनाथ में रह रहे थे, जबकि कुछ के पास वैध आधार कार्ड नहीं था.
सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का पता चलने पर Police ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ Police अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की. अभियान के दौरान कुल 15 लोगों को चालान जारी किए गए.
सुरक्षा उपाय के तौर पर वैध पहचान पत्र न होने पर व्यक्तियों को केदारनाथ धाम से गौरीकुंड वापस भेज दिया गया.
Police अधिकारियों ने बताया कि केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रा की पवित्रता और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी इस तरह के अचानक निरीक्षण जारी रहेंगे.
उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा के दौरान उचित सत्यापन और पहचान पत्र के बिना किसी भी व्यक्ति को धाम परिसर में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
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एमएस/
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