ऑपरेशन सिंदूर के एक साल : आतंकवाद पर कड़ा प्रहार, भारत की सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान धराशायी

New Delhi, 6 मई . Pakistan और पीओके में मौजूद आतंकवादियों के लॉन्च पैड पर भारतीय सेना के अचूक प्रहार आज भी Pakistanी नेताओं और सैन्य अधिकारियों के जिस्म में सिहरन पैदा करने के लिए काफी है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जिस तरह भारतीय सेना के तीनों अंगों ने एकसाथ Pakistan पर ताबड़तोड़ हमले किए कि Pakistan की सारी तैयारियां और गीदड़भभकी भी धराशायी हो गई.

यहां तक कि जब भारतीय शौर्य गाथा का बखान करने देश की शेरनियां सामने आईं, तो इस बदले India की तारीफ दुनियाभर में हुई. पीएम Narendra Modi के नेतृत्व में जिस तरह से भारतीय सेना ने ‘घर में घुसकर मारने’ की नीति रखी है, उसका असर Pakistan के साथ चीन पर भी देखने को मिल रहा है. यही कारण है कि India की ताबड़तोड़ सैन्य कार्रवाई और सिंधु नदी से जुड़े फैसले के बाद Pakistan चारों खाने चित हो गया है. यहां तक कि उसकी जनता भी कहीं न कहीं अपने शासकों के विरोध में है.

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की निर्मम हत्या के बाद India ने जिस तरह से जवाबी कार्रवाई की, वह दुनियाभर के आधुनिक सैन्य इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से चलाए गए इस अभियान ने न सिर्फ आतंकवादी ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई, बल्कि India की सैन्य क्षमता, रणनीतिक सोच और Political इच्छाशक्ति का भी स्पष्ट प्रदर्शन किया.

इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता और सीमित अवधि रही. मात्र चार दिनों के भीतर भारतीय सेना ने अपने सभी प्रमुख लक्ष्य हासिल कर लिए और इसके बाद स्थापित सैन्य चैनलों के माध्यम से युद्धविराम स्वीकार कर लिया. जहां दुनिया के कई संघर्ष वर्षों तक खिंचते रहे हैं, वहीं India ने एक नियंत्रित और उद्देश्यपूर्ण सैन्य कार्रवाई का उदाहरण पेश किया.

ऑपरेशन के दौरान India ने Pakistan और Pakistan अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित नौ बड़े आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. ये ठिकाने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के लिए लॉन्चपैड के रूप में काम कर रहे थे. सियालकोट और बहावलपुर जैसे क्षेत्रों तक की गई कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि India की पहुंच अब केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं है. इस दौरान 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे, जिनमें कई शीर्ष कमांडर भी शामिल थे.

India ने जहां आतंक और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया, वहीं नागरिकों को नुकसान से बचाने पर विशेष ध्यान दिया. इसके विपरीत, Pakistan ने नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन India की उन्नत रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को नाकाम कर दिया.

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना की भूमिका बेहद अहम रही. राफेल विमानों, स्कैल्प मिसाइलों और हैम्मर बमों का इस्तेमाल करते हुए भारतीय वायुसेना ने महज 23 मिनट में अपने मिशन को अंजाम दिया. Pakistan की एयर डिफेंस प्रणाली को जाम करते हुए इन हमलों को अंजाम देना तकनीकी और रणनीतिक श्रेष्ठता का प्रमाण माना जा रहा है.

India की एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली (आईएसीसीएस) और स्वदेशी ‘आकाशतीर’ प्रणाली ने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइल हमलों को विफल कर दिया. इससे देश के भीतर किसी बड़े नुकसान को रोका जा सका, जो इस ऑपरेशन की एक और बड़ी सफलता रही.

10 मई को India ने अपने अभियान का दायरा बढ़ाते हुए Pakistan के 11 सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कार्रवाई में Pakistan की वायुसेना की लगभग 20 प्रतिशत क्षमता को नुकसान पहुंचा. यह कदम एक परमाणु संपन्न देश के खिलाफ India की रणनीतिक हिम्मत को दर्शाता है.

ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की ‘जॉइंटनेस’ यानी तीनों सेनाओं के तालमेल को भी मजबूती से स्थापित किया. जहां नौसेना ने समुद्री दबाव बनाए रखा, वहीं थलसेना और वायुसेना ने समन्वित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया. इसके साथ ही, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तकनीक की भूमिका भी साफ तौर पर सामने आई. ब्रह्मोस, आकाश, तेजस और एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म इस ऑपरेशन में प्रभावी साबित हुए.

पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुए सुधार जैसे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का गठन, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा उत्पादन में वृद्धि और निजी क्षेत्र की भागीदारी इस सफलता की मजबूत नींव बने. आज रक्षा उत्पादन का बड़ा हिस्सा देश में ही हो रहा है, जिससे India की रणनीतिक स्वायत्तता और मजबूत हुई है.

इस ऑपरेशन में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम ने भी अहम भूमिका निभाई. इसरो द्वारा उपलब्ध कराई गई सैटेलाइट निगरानी और सूचना प्रबंधन ने मिशन को और सटीक बनाया. साथ ही, गलत सूचना से निपटने और जनसंचार को नियंत्रित रखने में भी Government सफल रही.

Political नेतृत्व की स्पष्ट दिशा भी इस सफलता का एक बड़ा कारण रही. Government ने सेना को पूरी ऑपरेशनल स्वतंत्रता दी, लेकिन साथ ही नागरिकों को नुकसान से बचाने का निर्देश भी स्पष्ट रखा. यह संतुलन India की रणनीतिक सोच और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है.

ऑपरेशन सिंदूर ने यह भी संकेत दिया कि India अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है. यह ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ India की नीति के लिए एक ‘नया सामान्य’ स्थापित करता है.

कुल मिलाकर, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि आधुनिक युद्ध केवल ताकत का नहीं, बल्कि रणनीति, तकनीक, तालमेल और Political इच्छाशक्ति का भी खेल है और इन सभी मोर्चों पर India ने अपनी क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया.

डीएससी