मध्य प्रदेश: उज्जैन सीवर चैंबर हादसे में एक मजदूर की मौत, दो का इलाज जारी

Bhopal , 7 जुलाई . Madhya Pradesh के उज्जैन जिले में Tuesday को एक खौफनाक हादसा हुआ, जहां सीवरेज प्रोजेक्ट के दौरान सीवर चैंबर के अंदर बेहोश होकर गिरे तीन मजदूरों में से एक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. वहीं, दो अन्य मजदूर अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है.

उज्जैन के Police अधीक्षक (एसपी) प्रदीप शर्मा ने तीनों मजदूरों में से एक की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि यह घटना भैरवगढ़ रोड पर पिपली नाका के पास सीवरेज के काम के दौरान हुई.

शर्मा ने समाचार एजेंसी को बताया, “इलाके में सीवरेज का काम चल रहा था, तभी सीवर चैंबर में उतरे दो मजदूरों को दम घुटने जैसा महसूस हुआ. उन्हें बाहर निकालने के लिए तीसरा मजदूर अंदर गया, लेकिन वह भी बेहोश हो गया.”

Police के अनुसार, स्थानीय लोगों ने चैंबर के अंदर फंसे मजदूरों को देखा और अधिकारियों को इसकी सूचना दी. Police टीमों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बचाव अभियान चलाया और तीनों मजदूरों को बाहर निकाला, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया.

उज्जैन के एसपी शर्मा ने कहा, “Police और स्थानीय लोगों की मदद से मजदूरों को सीवर चैंबर से बाहर निकाला गया. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, लेकिन दुर्भाग्य से इलाज के दौरान उनमें से एक की मौत हो गई.”

Police को शक है कि बंद सीवर चैंबर के अंदर जमा जहरीली गैसों की वजह से मजदूरों की तबीयत बिगड़ी. हालांकि, मौत की सही वजह का पता पोस्टमार्टम और जांच के नतीजों के बाद ही चलेगा. वहीं, Police की ओर से मृतक की पहचान अभी आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि ऐसी खतरनाक जगहों पर काम करने वाले मजदूर अक्सर जहरीली गैसों के संपर्क में आ जाते हैं, खासकर तब जब बंद जगहों में घुसने से पहले सुरक्षा के जरूरी इंतजाम नहीं किए जाते.

Police ने घटना की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मजदूरों को जरूरी सुरक्षा उपकरण दिए गए थे और क्या सीवरेज के काम के दौरान तय सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था.

जांच के तहत ठेकेदार, साइट सुपरवाइजर और मौके पर मौजूद अन्य मजदूरों के बयान भी दर्ज किए जाने की उम्मीद है. हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर सीवर की सफाई और रखरखाव के काम में लगे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि सुरक्षा नियमों में लापरवाही के कारण देश भर में अक्सर ऐसे जानलेवा हादसे होते रहते हैं.

डीके/डीकेपी