‘एक राज्यपाल, दो राज्य और दो अलग रुख’, मुल्लापेरियार बांध विवाद पर तमिलनाडु-केरल के बीच अनोखी स्थिति

तिरुवनंतपुरम, 18 जून . मुल्लापेरियार बांध विवाद को लेकर Thursday को एक अनोखी संवैधानिक और Political स्थिति देखने को मिली, जब केरल के Governor राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने तमिलनाडु विधानसभा में नई टीवीके Government का नीतिगत अभिभाषण पढ़ा. वह फिलहाल तमिलनाडु के Governor का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं.

इस अभिभाषण में तमिलनाडु Government ने स्पष्ट रूप से दोहराया कि वह मुल्लापेरियार बांध को सुरक्षित मानती है और केरल द्वारा नए बांध के निर्माण की किसी भी मांग का कानूनी और Political स्तर पर विरोध जारी रखेगी.

Political हलकों में इस बात को लेकर चर्चा रही कि वही Governor, जो केरल के संवैधानिक प्रमुख भी हैं, तमिलनाडु विधानसभा में ऐसा नीति वक्तव्य पढ़ रहे थे जो मुल्लापेरियार विवाद पर केरल के आधिकारिक रुख के बिल्कुल विपरीत है.

तमिलनाडु Government के नीति वक्तव्य में कहा गया कि राज्य मुल्लापेरियार बांध पर अपने अधिकारों की रक्षा करता रहेगा और मौजूदा बांध को हटाकर नया बांध बनाने के हर प्रयास का विरोध करेगा.

दूसरी ओर, केरल लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि 100 वर्ष से अधिक पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं हैं और नीचे रहने वाली आबादी की सुरक्षा के लिए नया बांध बनाया जाना आवश्यक है.

इस घटनाक्रम ने उस विशेष संवैधानिक स्थिति को भी उजागर किया है, जिसमें एक ही Governor दो पड़ोसी राज्यों का दायित्व संभालते हुए ऐसे दो निर्वाचित Governmentों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिनके बीच एक अंतरराज्यीय विवाद पर बिल्कुल अलग-अलग मत हैं.

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार Governor का दायित्व अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त करना नहीं, बल्कि निर्वाचित Government की नीतियों और निर्णयों को विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करना होता है. इसके बावजूद इस स्थिति ने Political और संवैधानिक स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि एक ही Governor सार्वजनिक रूप से दो विपरीत पक्षों का प्रतिनिधित्व कैसे कर रहे हैं.

मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा लंबे समय से केरल और तमिलनाडु के बीच सबसे संवेदनशील जल विवादों में से एक रहा है. जहां तमिलनाडु अपने दक्षिणी जिलों की जलापूर्ति के लिए इस बांध पर निर्भर है, वहीं केरल लगातार इसकी पुरानी संरचना को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताता रहा है.

विजय के नेतृत्व वाली नई टीवीके Government के नीति वक्तव्य से यह भी स्पष्ट हो गया है कि तमिलनाडु में Political नेतृत्व बदलने के बावजूद मुल्लापेरियार बांध को लेकर राज्य की पारंपरिक नीति में कोई बदलाव नहीं होगा.

केरल के लिए यह घटनाक्रम संकेत है कि भविष्य में मुल्लापेरियार मुद्दे पर किसी भी कानूनी या Political पहल का सामना तमिलनाडु के एकजुट और सख्त रुख से करना पड़ेगा.

डीएससी