
Ahmedabad, 19 मई . भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के उस बयान पर टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें ‘एसआईआर’ से फायदा हुआ. उन्होंने बंगाल में पुजारियों और मौलवियों का वेतन रोके जाने के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के एसआईआर वाले बयान पर भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने समाचार एजेंसी से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस पार्टी की राजनीति के मुख्य बिंदु एसआईआर का विरोध या वोट चोरी का राष्ट्रीय अभियान विफल रहा. बिहार में चुनाव हारने के बाद एसआईआर पर ठीकरा फोड़ दिया, केरल में लगा कि चुनाव जीतेंगे तो वहां अभियान नहीं चलाया. केरल में क्या वोट चोरी नहीं होते हैं. केरल का एसआईआर अच्छा है, बिहार का खराब है. इस मुद्दे को लेकर दोहरा मापदंड नहीं हो सकता. जहां कांग्रेस की जीत होती है वहां का एसआईआर ठीक है. उनकी पार्टी के नेता ही कह रहे हैं कि एसआईआर का फायदा हुआ.
भाजपा नेता ने कहा कि एसआईआर एक चुनावी प्रक्रिया है, जिसके जरिए वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है. इसका विरोध करके दूसरों पर ठीकरा फोड़ने का विफल प्रयास कर रहे हैं, यह सब जनता के सामने है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को यह समझना होगा कि जो पार्टी आज भी आजादी के नाम पर वोट मांगती है, वह अपनी मूल विचारधारा से बहुत दूर चली गई है. इसीलिए महात्मा गांधी ने कहा था कि आजादी के बाद कांग्रेस पार्टी को खत्म कर देना चाहिए. यह अब वैसी कांग्रेस नहीं रही. यह एक वामपंथी तरह की कांग्रेस है, जो पूरी तरह से वामपंथी एजेंडे से चलती है, जिसके लिए राष्ट्रवाद कोई मायने नहीं रखता और जहां सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति मायने रखती है.
भाजपा नेता ने बंगाल में पुजारियों और मौलवियों का वेतन रोके जाने का समर्थन किया है. रोहन गुप्ता कहते हैं, “Government की प्राथमिकता बहुत साफ है. आज जब लोगों ने इतना बड़ा जनादेश दिया है, तो Government 24×7 मोड में काम कर रही है. हर कोई अपना काम करने पर ध्यान दे रहा है. सुवेंदु अधिकारी और सभी मंत्री एक्शन मोड में हैं. जो भी वादे किए गए हैं, उन पर ध्यान इस बात पर है कि उन्हें समय पर कैसे पूरा किया जाए. पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए, यह आजादी की लड़ाई जीतने जैसा है. सबको अधिकार मिलेगा लेकिन विशेषाधिकार को रोकने की जरूरत है. यही Government का मिशन है और इस पर Government आगे बढ़ रही है.
सड़क पर नमाज पढ़ने वाले विवाद को लेकर रोहन गुप्ता कहते हैं कि यह लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है,बल्कि तुष्टीकरण के खिलाफ है. जब सड़कों पर नमाज पढ़ने की बात आती है, तो यूएई, सऊदी अरब या ईरान जैसे इस्लामिक देशों में भी सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक है. इसलिए, इसे धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था और अनुशासन का मामला है. किसी को भी खास अधिकार नहीं दिए जा सकते. कोई भी जो अपने धर्म का पालन करना चाहता है और नमाज पढ़ना चाहता है. इसको मुस्लिमों के खिलाफ बताकर अरशद मदनी जैसे लोग जो अपनी Political दुकान चला रहे हैं, विरोध तो उनका है. इन बातों को मुसलमान भाई-बहन भी समझते हैं. यह मुसलमानों के अधिकार पर किसी प्रकार का हमला नहीं है. मुझे लगता है कि इस प्रकार की राजनीति से लोगों को बचना चाहिए.
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एएसएच/
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