
श्रीनगर, 8 मई . जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने Friday को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और यूटी विधानसभा में उसके नेता पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया.
अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता (एलओपी) सुनील शर्मा किसी भी तरह से जम्मू-कश्मीर में Chief Minister की कुर्सी पाने का इंतजार कर रहे हैं.
शर्मा ने कहा था कि सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) में टूट हो सकती है. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एलओपी को याद रखना चाहिए कि यहां 2029 से पहले चुनाव नहीं होने वाले हैं और यह कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में कोई एकनाथ शिंदे नहीं है. कोई भी पार्टी छोड़कर नहीं जा रहा है.
उनका इशारा शिवसेना के उस वरिष्ठ नेता की ओर था, जिसने पार्टी को तोड़ा था और Maharashtra में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी Government के गिरने का कारण बना था.
अब्दुल्ला ने कहा कि लोगों को शर्मा के बयान से भाजपा के इरादों को समझना चाहिए. एकनाथ शिंदे इसलिए चले गए, क्योंकि भाजपा ने उन्हें पार्टी छोड़ने में मदद की थी. लोगों को एलओपी के बयान के जरिए भाजपा के इरादों को समझना चाहिए. हम उनके हाथों पहले ही बहुत कुछ भुगत चुके हैं.
उन्होंने जोर देकर कहा कि यहां परिसीमन सिर्फ भाजपा और उसके समर्थकों की मदद करने के इरादे से किया गया था. वे राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर लोगों को धमका रहे हैं. ऐसा नहीं लगता कि उनका जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का कोई इरादा है. यहां कैबिनेट का विस्तार इसलिए नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने हमें राज्य का दर्जा नहीं दिया है और इस अफवाह में कोई सच्चाई नहीं है कि हम टूट के डर से कैबिनेट विस्तार में देरी कर रहे हैं.
तमिलनाडु की स्थिति पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य में President शासन लगाने का कोई कारण नहीं है.
उमर अब्दुल्ला ने याद दिलाया कि 1996 में President ने अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर केंद्र में Government बनाने के लिए आमंत्रित किया था. जब वे Lok Sabha में अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए, तो वह Government 13 दिनों के बाद गिर गई थी.
सीएम ने पूछा कि तमिलनाडु के लिए अलग पैमाना क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है, सिर्फ इसलिए कि वहां चुनावों में भाजपा बहुमत हासिल करने में नाकाम रही?
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एएसएच/
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