
नई दिल्ली, 27 जून . India और अमेरिका के संबंधों में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच ऊर्जा सुरक्षा एक अहम मुद्दा है. घरेलू तेल भंडारों की संभावनाएं India की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती दे सकती हैं.
पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने से बात करते हुए India के तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने के प्रयासों पर बात की. उन्होंने बताया कि India अब वेनेजुएला के साथ-साथ ईरान और नाइजीरिया से भी सस्ता कच्चा तेल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.
पूर्व राजदूत ने बताया कि India में वेनेजुएला से जो ऑयल आता है वह जामनगर रिफाइनरी और एक दो नायरा रिफाइनरी में आ रहा है, लेकिन वेनेजुएला के तेल की समस्या यह है कि वेनेजुएला का तेल आमतौर पर भारी है. जोकि 30 और 25 एपीआई 25 डिग्री के डेंसिटी से भी कम का है. इसको रिफाइन करने के लिए सिर्फ दो-तीन रिफाइनरी इंडस्ट्रीज पश्चिमी तट पर हैं, जो इसको रिफाइन कर सकती हैं.
उन्होंने बताया कि बाकी की तेल रिफाइनरी से भी इस तेल का रिफाइन कराया जा सकता है, लेकिन उसमें बड़ा पैसा खर्च होता है. फिलहाल अभी हम वेनेजुएला से तेल ले रहे हैं. अच्छी बात यह है कि अब आगे हम वेनेजुएला के साथ-साथ ईरान से भी तेल लेना शुरू कर देंगे.
उन्होंने बताया कि ईरान के ऊपर से प्रतिबंध हट गया है और ईरान का तेल सस्ता है. नाइजीरियन तेल सस्ता है तो हम वहां से भी तेल लेना अब शुरू कर देंगे.
पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने कहा कि इसके अलावा सबसे अच्छी बात यह है कि अब तेल ऊर्जा पर हमारी विदेशी निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो जाएगी. उन्होंने कहा कि India Government ने घोषणा भी की है कि अंडमान की खाड़ी में एक नए तेल भंडार का पता चला है, जो काफी ज्यादा है. शायद दो लाख करोड़ बैरल का तेल वहां मिल सकता है.
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एवाई/डीकेपी
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