ऑफिस स्ट्रेस बन सकता है डिप्रेशन और मौत की वजह, इंडियाना विवि के शोधकर्ताओं के नए अध्ययन का निष्कर्ष · Indias News

ऑफिस स्ट्रेस बन सकता है डिप्रेशन और मौत की वजह, इंडियाना विवि के शोधकर्ताओं के नए अध्ययन का निष्कर्ष


नई दिल्ली (New Delhi). विश्व भर में कई स्टडीज ऐसी हुई हैं जिनमें ऑफिस से होने वाले तनाव के हेल्थ रिस्क के बारे में कई तथ्य सामने आए हैं. अधिकांश विशेषज्ञ इस बात पर एकमत हैं कि किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा प्रतिबंधित और अत्यधिक तनावपूर्ण वर्कप्लेस का माहौल लोगों में काफी तनाव पैदा कर सकता है, जोकि कई गंभीर मनोवैज्ञानिक जैसे कि डिप्रेशन और घबराहट का कारण बन सकता है. अमेरिका में इंडियाना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन की रिपोर्ट काफी हैरान और परेशान करने वाली है. इस स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार, तीन कारकों के संयोजन – उनके काम पर कम नियंत्रण और संज्ञानात्मक क्षमता पर तनाव – ऑफिस में मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर गिरावट का कारण बन सकता है, इससे डिप्रेशन और यहां तक कि मौत का खतरा भी पैदा हो सकता है.

स्टडी को लीड करने वाले एरिक गोंजालेज-मुले का कहना है कि शोध में हमने पाया कि जिस काम में एम्लोयीज (वर्कर) का नियंत्रण कम होता है या जिन लोगों की संज्ञानात्मक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, उनमें डिप्रेशन और मौत की संभावना ज्यादा होती है. उनका कहना है कि जब व्यक्ति की क्षमता से ज्यादा नौकरी की डिमांड या वर्कप्रेशर होता है तो उसके मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट हो सकती है और इसके बाद मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं ने इस स्टडी के लिए अमेरिका के विस्कॉन्सिन में रहने वाले 3,148 प्रतिभागियों का डाटा इक्कठा किया तो इस हैरान करने वाले परिणाम पर पहुंचे. स्टडी के 20 सालों में 211 लोगों की मौत हो गई.

कंट्रोल हो तो काम और सेहत होतेहैं बेहतर:

इस शोध का एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है, शोधकर्ताओं के अनुसार, जब एक वर्कर का अपने काम और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति ज्यादा होल्ड या कंट्रोल होता है तो उस समय काम के दबाव के बावजूद भी काम और सेहत दोनों बेहतर होते हैं. महामारी (Epidemic) की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए, जहां लोग बहुत दबाव में काम कर रहे हैं, गोंजालेज-मूले ने कहा, “कोविड19 की वजह से कई मानसिक परेशानियां पैदा हो सकती हैं, इसलिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि काम लोगों की समस्या को बढाए नहीं. इसलिए मैनेजमेंट के लिए इस महामारी (Epidemic) के समय यह पहले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि कर्मचारियों की क्षमता के हिसाब से ही उन्हें काम दे और उन्हें काम को लेकर स्वायत्तता यानी कि सेल्फ कंट्रोल दिया जाए.

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