मेडीकल में जोर पकड़ रहा नर्सों का आंदोलन

जबलपुर, 11 जून . मेडिकल विश्वविद्यालय में जहां एक तरफ पैरामेडिकल स्टॉफ के आंदोलन का असर दिखना शुरु हो रहा है, तो दूसरी तरफ मेडिकल प्रशासन की चिंता बढ़ना शुरु हो गई. नर्सेज अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध सप्ताह चला रही हैं, इस दौरान वे बिना काम को प्रभावित किये अपना क्रमबद्ध तरीके से अपना आंदोलन चला रही हैं. आंदोलन के तीसरे दिन शुक्रवार (Friday) को नर्सेज ने काली पट्टी बांधकर काम करने के साथ ही ओपीडी के सामने पीपीई किट पहनकर नाटक के जरिए नर्सेस की पीड़ा और शासन की वर्किंग को दर्शाया गया. हलांकी इस दौरान मेडिकल में नर्र्सेस की सेवाएं जारी रहीं. मध्य प्रदेश नर्सिंग एसोसिएशन 11720 की जिलाध्यक्ष हर्षा सोलंकी ने कहा कि पिछले दो दिन से हम विरोध सप्ताह मना रहे हैं, लेकिन अभी तक शासन की ओर से हमारे साथ बैठक के संबंध में कोई सूचना नहीं है. चरणबद्ध आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक नर्सेस के हित में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है.

11 सालों से सरकार कर रही नजर अंदाज…………….

नर्सेज का कहना है की पिछले 11 वर्षों से सभी नर्सेस निवेदन और ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात सरकार के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक ढाक के तीन पात की तरह स्थिति बनी हुई है. ऐसे इस बार हम जब ही आंदोलन को विराम देंगे, जब सरकार लिखित में यह बताएगी कि वह हमारी मांगें मान रही है या नहीं. विरोध सप्ताह के अंतिम चरण यानि प्रेस कांफ्रेस के बाद पूरे प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेज में नर्सेस काम बंद कर देगी, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी.

आज मानव शृंखला बनाएंगे…………….

हर्षा सोलंकी ने बताया कि आज विरोध सप्ताह के चौथे दिन मानव श्रृखंला निकाली जाएगी. शुक्रवार (Friday) को हमने कुछ देर का सांकेतिक प्रदर्शन किया है विरोध सप्ताह के साथ मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े लिहाजा सभी नर्सेस
अपनी सेवाएं दे रही हैं. सांकेतिक विरोध सप्ताह के कारण फिलहाल मेडिकल में मरीजों की सेवा पर असर नहीं है,
लेकिन काम बंद हड़ताल हुई तो चिकित्सीय सेवाएं प्रभावित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.

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