
वाशिंगटन, 30 जून . अमेरिका में India के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि India सिर्फ एक जरूरी वैश्विक साझेदार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर का जरूरी आधारस्तंभ बन गया है, जो लगातार आर्थिक विकास, भरोसेमंद साझेदारी और तकनीकी बदलाव से आगे बढ़ रहा है.
अमेरिका-India रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में भारतीय राजदूत क्वात्रा ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में India की आर्थिक तरक्की ने देश को भू-Political अनिश्चितता के बीच एक स्थिर भूमिका निभाने की स्थिति में ला दिया है. इसके साथ ही व्यापार, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्र में अमेरिका जैसे साझेदारों के साथ सहयोग को मजबूत किया है.
भारतीय राजदूत क्वात्रा ने कहा, “मैं आपकी बात को थोड़ा अलग तरीके से कहूंगा. मैं कहूंगा कि जिस तरह की चुनौतियों और मुश्किलों का हम सामना कर रहे हैं, उन्हें देखते हुए Prime Minister मोदी का India सिर्फ एक जरूरी स्तंभ नहीं है. मुझे लगता है कि यह ग्लोबल ऑर्डर, आर्थिक विकास, स्थिरता, भरोसे और विश्वसनीयता का एक जरूरी सहारा है.”
उन्होंने कहा कि India की बढ़ती वैश्विक भूमिका तीन वजहों से तय हुई है: तेजी से बदलती घरेलू अर्थव्यवस्था, लगातार अनिश्चित होता भू-Political माहौल और स्ट्रक्चरल सुधार जिन्होंने देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया है.
उन्होंने कहा कि Government का आत्मनिर्भर India का विजन अपने अंदर की तरफ देखने वाला नहीं है, बल्कि इसे दुनिया भर में मुकाबला करने वाली मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.
भारतीय राजदूत ने कहा, “Prime Minister ने आत्मनिर्भरता की ऐसी अवधारणा प्रस्तुत की है, जो आत्मकेंद्रित नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग के साथ संतुलित है. यह ऐसा इकोसिस्टम है, जो सकारात्मक वैश्विक प्रभाव पैदा करता है और अलग-थलग रहने की सोच पर आधारित नहीं है.”
उन्होंने कहा कि India मैन्युफैक्चरिंग, उच्च तकनीक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि देश की विकास क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को और मजबूत किया जा सके.
उन्होंने कहा, “मैं कहूंगा कि खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा. आप इन तीनों और कई दूसरी सुरक्षा को आर्थिक सुरक्षा के बड़े दायरे में ला सकते हैं.”
क्वात्रा ने अनुमान लगाया कि भारत, जो अभी 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, इस दशक के आखिर तक लगभग 7 ट्रिलियन डॉलर, 2030 के दशक के बीच तक लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 25 ट्रिलियन डॉलर से 30 ट्रिलियन डॉलर के बीच पहुंचने की राह पर है.
भारतीय राजदूत ने कहा कि उभरती तकनीकों भारत-अमेरिका सहयोग के अगले चरण को तय करेंगी, जिसमें बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर को प्राथमिक क्षेत्रों के तौर पर पहचाना जाएगा.
हाल ही में लॉन्च हुए बायोसार्थी 2026 इनिशिएटिव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि India बायोटेक्नोलॉजी और बायोफार्मास्युटिकल्स में इनोवेशन की एक नई लहर के लिए तैयारी कर रहा है.
क्वात्रा ने कहा, “यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां India के पास पहले से ही यूनिवर्सल टैलेंट का बहुत मजबूत आधार है. इस पहल का मकसद इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग, रेगुलेशन और दवा की खोज को मजबूत करना है.”
उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी Prime Minister मोदी के अमेरिकी दौरे के दौरान लॉन्च किए गए द्विपक्षीय ट्रस्ट पहल का एक केंद्रय स्तंभ बन गई है.
विनय मोहन क्वात्रा ने कहा, “हम इसे एक ऐसे स्पेस के तौर पर देखते हैं जिसमें बायोटेक्नोलॉजी में सहयोग के लिए असल में चार रास्ते होंगे, एक मैन्युफैक्चरिंग, दो व्यापार, तीन शोध और इनोवेशन और चार रेगुलेटरी सहयोग.”
क्वात्रा ने India के बढ़ते बायोटेक्नोलॉजी स्टार्टअप इकोसिस्टम पर भी जोर दिया और कहा, “कल तक India में, बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में हमारे पास लगभग 12,000 स्टार्टअप थे.”
उन्होंने कहा कि उन स्टार्टअप्स को अमेरिकी वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम से जोड़ने से दोनों देशों के बीच इनोवेशन काफी मजबूत होगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर, क्वात्रा ने कहा कि India पूरी एआई वैल्यू चेन पर काम कर रहा है. जहां तक India की बात है, हम सभी पांच स्तरों पर काम कर रहे हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को आखिरकार तकनीक के बजाय उसके दिए गए नतीजों से आंका जाना चाहिए. अगर एआई को समाज के लिए स्वीकार्य रूप में बढ़ाना है, तो आखिरकार उसे खुद को ऐसे नतीजों में बदलना होगा जिनसे लोग जुड़ सकें.
उन्होंने कहा कि India अमेरिका के साथ करीबी साझेदारी करते हुए एआई के सभी स्तरों में कुछ हद तक स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी और रेजिलिएंस चाहता है. क्वात्रा ने कहा कि 2030 तक 500 बिलियन डॉलर के व्यापार के द्विपक्षीय लक्ष्य को पाने के लिए सिर्फ आयात और निर्यात बढ़ाने से कहीं ज्यादा गहरे इंटीग्रेशन की जरूरत होगी.
भारतीय राजदूत ने कहा, “दोनों नेताओं ने जो जरूरी लक्ष्य तय किए, उनमें से एक मिशन 500 है, जिसका मकसद 2030 के आखिर तक 500 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय हासिल करना है. हम अभी लगभग 240 बिलियन पर हैं.”
उन्होंने कहा कि व्यापार में विकास मजबूत सप्लाई चेन, ज्यादा निवेश, मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग, इनोवेशन और स्किल्ड टैलेंट की मोबिलिटी पर निर्भर करेगी. व्यापार अकेले नहीं बढ़ता और चलता है. व्यापार तब चलता है जब आपकी सप्लाई चेन बेहतर तरीके से जुड़ी होती हैं, जब कैपिटल का अच्छा फ्लो होता है, जब इनोवेशन, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल मोबिलिटी एक साथ मिलते हैं.
सेमीकंडक्टर का उदाहरण देते हुए, क्वात्रा ने कहा कि India लगभग बिना किसी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम से माइक्रोन की फैसिलिटी चालू करने और कमर्शियल प्रोडक्शन की तैयारी करने तक पहुंच गया है.
उन्होंने कहा, “दो, तीन साल पहले, हमारे पास एक नई या न के बराबर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री थी. उम्मीद है कि पायलट प्रोडक्शन इस साल के आखिर तक शुरू हो जाएगा और अगले साल के आखिर तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा.”
उन्होंने इस तरक्की को भारत-अमेरिका औद्योगिक साझेदारी का एक बहुत ही ठोस सफर बताया.
जब क्वात्रा से पूछा गया कि वे समिट में हिस्सा लेने वालों को क्या मैसेज देंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, “भरोसा, भरोसेमंद होना, सप्लाई चेन, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों को फायदा और आर्थिक विकास और खुशहाली.”
उन्होंने यह भी कहा कि India इस साल के जी20 समिट में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्सुक है और याद दिलाया कि New Delhi ने तनावपूर्ण भऊ-Political माहौल के बावजूद अपनी अध्यक्षता के दौरान आम सहमति बनाई थी.
India और अमेरिका ने पिछले कई सालों में जरूरी और नई तकनीक, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और मजबूत सप्लाई चेन में लगातार सहयोग बढ़ाया है. ये कोशिशें रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के साथ-साथ बड़ी रणनीतिक साझेदारी के मुख्य आधार बन गई हैं.
दोनों देश 2030 तक आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लिए एक बड़े रोडमैप पर भी काम कर रहे हैं. साथ ही, ट्रस्ट फ्रेमवर्क और भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट जैसी पहलों के तहत सहयोग को मजबूत कर रहे हैं, जो इनोवेशन, भरोसेमंद टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और लंबे समय तक आर्थिक मजबूती पर दोनों देशों का जोर दिखाता है.
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पीएम
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