
New Delhi, 23 मई . कूटनीति से इतर Prime Minister Narendra Modi की विदेश यात्रा अक्सर उनकी ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ के कारण चर्चित रही है. इसका हालिया उदाहरण उनकी रोम की यात्रा है, जहां उन्होंने इटली की Prime Minister जॉर्जिया मेलोनी को पार्ले की ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट की. पीएम मोदी के इस गिफ्ट की चर्चा हर जगह रही है. लेकिन याद रहे कि Prime Minister मोदी की ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ में कई बार ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ भी नजर आई है, जिसका सिलसिला 2014 से ही चला आ रहा है.
वैसे तो Prime Minister मोदी ने India की सांस्कृतिक धरोहरों से दूसरे देश के लीडर्स को गिफ्ट के जरिए रूबरू कराया है, लेकिन उनकी ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ में सबसे अहम ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ (गीता) रही है, जिसे वह अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग राष्ट्राध्यक्षों को भेंट करते आए हैं. सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि पीएम मोदी ने ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ की किताब जिस भी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट की है, वे उन्हीं के देश की भाषा में लिखित रही.
2014 में Prime Minister बनने के बाद Narendra Modi अपने पहले अमेरिकी दौरे पर ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ की प्रति लेकर गए थे, जो उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी President बराक ओबामा को गीता भेंट की थी. उन्होंने व्हाइट हाउस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान ओबामा को महात्मा गांधी की ओर से लिखित ‘गीता’ उपहार में दी थी.
जब Prime Minister मोदी 2014 में जापान यात्रा पर गए थे, तब भी वे सम्राट अकिहितो और Prime Minister शिंजो आबे के लिए ‘श्रीमद्भगवद्गीता’ की प्रतियां ले गए थे. यह प्रतियां जापानी भाषा में लिखी हुई थीं.
दिसंबर 2025 में जब रूस के President व्लादिमीर पुतिन का India आना हुआ, तब भी Prime Minister मोदी ने उन्हें रूसी भाषा में लिखी हुई गीता की एक प्रति भेंट की. उस समय पीएम मोदी ने कहा था, “गीता के उपदेश विश्व भर के लाखों लोगों को प्रेरणा देते हैं.”
कई अवसरों पर Prime Minister Narendra Modi ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक और संदेशों को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने की कोशिश की है. वे मानते हैं कि गीता के शब्द व्यक्तियों के मार्गदर्शन के साथ ही राष्ट्र की नीतियों की दिशा भी निर्धारित करते हैं.
Prime Minister मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा था, “भगवद् गीता सिखाती है कि शांति और सत्य बनाए रखने के लिए अन्याय की शक्तियों का सामना करना और उन्हें समाप्त करना आवश्यक हो सकता है और यही सिद्धांत राष्ट्र की सुरक्षा के दृष्टिकोण में केंद्रित है.”
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डीसीएच/पीएम
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