
Mumbai , 24 जून . Maharashtra Government के मंत्री नितेश राणे ने Wednesday को यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी), मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कानून व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी. पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यूसीसी का समर्थन करते हुए कहा कि इसका प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है.
नितेश राणे ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर के संविधान में समान नागरिक संहिता का उल्लेख है. उन्होंने यूसीसी का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग देश में अलग-अलग कानून व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए.
मंत्री ने कहा कि India का संविधान सर्वोपरि है और किसी भी अन्य को कानून व्यवस्था को संविधान के ऊपर नहीं रखा जा सकता. उन्होंने यूसीसी को लेकर अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता कानून लागू होना जरूरी है.
वहीं, मौलाना सैयद अरशद मदनी के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे ने कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो लोग देश में जिहाद की बात करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में ऐसी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती जो समाज में तनाव या हिंसा को बढ़ावा दे.
उन्होंने एआईएमपीएलबी (ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास के बयान पर सवाल उठाया कि जब देश में एक संविधान लागू है तो अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की आवश्यकता क्यों है. उन्होंने कहा कि सभी लोगों को संविधान के अनुसार चलना चाहिए और देश में समान व्यवस्था होनी चाहिए.
उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को लेकर भी बयान दिया और कहा कि देश में वही संस्थाएं होनी चाहिए जो संविधान के अनुरूप काम करें. उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग कानून व्यवस्था की मांग देश की एकता के लिए ठीक नहीं है.
पार्टूर में स्कूल के एक कार्यक्रम को लेकर हुए विवाद पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति देश की शांति और व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल होता है तो समाज और कानून व्यवस्था को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए नितेश राणे ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जो लोग राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें पहले अपने रिकॉर्ड पर भी विचार करना चाहिए. उन्होंने विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने से पहले नैतिक आधार होना जरूरी है.
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एससीएच/डीकेपी
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