
नर्मदापुरम, 5 जून . Madhya Pradesh के नर्मदापुरम दौरे पर पहुंचे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए. कलेक्ट्रेट में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कई मामलों में सुधार की जरूरत है और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए.
नर्मदा नदी के प्रदूषण को लेकर उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि Government ने मां नर्मदा को जीवित इकाई का दर्जा दिया है, ऐसे में नदी के आसपास और निर्धारित क्षेत्र में मटन की दुकानों का संचालन नियमों के खिलाफ है. उन्होंने इस संबंध में भी जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए.
उन्होंने नर्मदा नदी में सीधे गंदे नालों का पानी छोड़े जाने को लेकर कहा कि बिना सीवरेज ट्रीटमेंट के गंदा पानी नदी में जाना पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा है. इससे भविष्य में गंभीर बीमारियां और महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है.
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य Governmentें नदियों को स्वच्छ रखने के लिए बड़ी राशि खर्च कर रही हैं. इसके बावजूद यदि गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है तो यह प्रशासनिक लापरवाही का मामला है. उन्होंने अधिकारियों को जिम्मेदारी तय करने और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए.
इसके साथ ही नर्मदा घाट पर बन रही पाइपलाइन और एसटीपी पंपिंग स्टेशन की डिजाइन पर भी सवाल उठाए गए. कानूनगो ने पूरे प्रोजेक्ट की तकनीकी समीक्षा कराने और ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए ताकि भविष्य में प्रदूषण की समस्या को प्रभावी ढंग से रोका जा सके.
प्रियंक कानूनगो ने बताया कि शहर में एक घाट और एक मोहल्ले का नाम जातिसूचक पाया गया है, जो संविधान की भावना और सामाजिक समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है. उन्होंने जिला प्रशासन को ऐसे नामों को बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए. उनका कहना है कि समाज में समानता और सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के नामों पर पुनर्विचार जरूरी है.
दौरे के दौरान राम-जानकी मंदिर के पास संचालित एक कथित अवैध मटन दुकान का मामला भी सामने आया. इस पर उन्होंने अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और यदि कोई अवैध गतिविधि चल रही है तो उस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए.
इसके अलावा नगर पालिका में आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे सफाई कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा भी उठा. शिकायत मिली कि कई कर्मचारियों को कलेक्टर दर के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है. इस पर कानूनगो ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कर्मचारियों के बैंक खातों में समय पर और निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन पहुंचना चाहिए. उन्होंने श्रम विभाग को भी भुगतान रिकॉर्ड और रोस्टर की जांच करने के निर्देश दिए. यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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पीआईएम/डीकेपी
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