एनएचआरसी ने कोलकाता में गोदाम ढहने की घटना पर लिया, पुलिस और म्युनिसिपल कमिश्नर को नोटिस जारी

New Delhi, 2 जुलाई . राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम की इमारत गिरने से 16 मजदूरों की मौत और 20 अन्य के घायल होने की मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया है.

यह देखते हुए कि अगर समाचार रिपोर्टों में दी गई बातें सच हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मामला है. देश की शीर्ष मानवाधिकार संस्था ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, कोलकाता Police कमिश्नर और म्युनिसिपल कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

एनएचआरसी ने कहा कि उम्मीद है कि इस रिपोर्ट में जांच की स्थिति के साथ-साथ मृतक और घायल लोगों के परिजनों को दिए गए मुआवजे (अगर कोई हो) का विवरण भी शामिल होगा.

मानवाधिकारों की शीर्ष संस्था के अनुसार, यह घटना 24 जून को हुई, जब कोलकाता के तारातला इलाके में बन रहा एक गोदाम ढह गया. खबरों के मुताबिक वेयरहाउस के लोहे के ढांचे की कंक्रीट कास्टिंग अचानक ढहने से निर्माण स्थल पर काम कर रहे करीब 40 मजदूर मलबे में दब गए.

एनएचआरसी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंजूर किया गया बिल्डिंग प्लान दोषपूर्ण था, जिसके कारण यह हादसा हुआ.

Wednesday को कोलकाता नगर निगम ने एक ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (ओएसडी) को सस्पेंड कर दिया. उन्हें इस घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और वे 72 घंटे से ज्यादा समय तक Police कस्टडी में रहे थे.

Police बिल्डिंग प्लान की मंजूरी में गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही है.

इससे पहले पश्चिम बंगाल के Chief Minister ने मारे गए लोगों के परिवारों को राज्य के खजाने से 10 लाख रुपए और घायलों को 1-1 लाख रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की.

Prime Minister कार्यालय ने Prime Minister राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए और हर घायल व्यक्ति को 50,000 रुपए का मुआवजा देने की भी घोषणा की.

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