आजाद हिंद ग्राम में नेताजी ने दिया था अपना आखिरी भाषण

नई दिल्ली (New Delhi) . तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा देने वाले वीर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की यादों से रचा बसा है दिल्ली का आजाद हिंद ग्राम. मुंडका के टीकरी कलां स्थित इसी स्थान पर नेताजी ने अपने जीवन का आखिरी भाषण 1944 में दिया था. आजादी के संघर्ष के प्रतीक के तौर पर निर्मित यह आजाद हिंद ग्राम आज भी ऐतिहासिक स्मारक के रूप में जाना जाता है. स्मारक में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजादी संग्राम से संबंधित तमाम घटनाओं को चित्रित व लिखित रूप में संग्रहित किया गया है. कभी सैलानियों से गुलजार रहने वाला यह पर्यटक स्थल आज देखरेख की कमी झेल रहा है. यही कारण है कि आज आजाद हिंद ग्राम में पहुंचने वाले सैलानियों की तादाद कम होती जा रही है.

नेताजी के बलिदान को देखते हुए सरकार ने उनकी 125वीं जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया है. तो अब यह उम्मीद जगी है कि दिल्ली के आजाद हिंद ग्राम को विकास की नई राह मिलेगी. ऐसे बताया जाता है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आजादी के आंदोलन के दौरान वर्ष 1944 में कथित तौर पर विमान हादसे के शिकार होने से पूर्व आखिरी भाषण यहीं दिया था. उनके भाषण को सुनने के बाद आसपास के गांव की महिलाएं इतनी प्रभावित हो गई थी कि उन्होंने अपने घरों से गहने व कीमती वस्तुएं लाकर नेताजी को दे दिया था ताकि भारत माता को ब्रिटिश हुकूमत की जंजीरों से मुक्त करा सकें.

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