
काठमांडू, 7 जुलाई . नेपाल के Prime Minister बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह ने Tuesday को दौरे पर आए एशियाई वित्त बैंक (एडीबी) के अध्यक्ष मासातो कांडा के साथ बैठक की. बालेंद्र शाह के Prime Minister पद संभालने के बाद से विदेशी गणमान्य व्यक्ति के साथ यह पहली बैठक है.
पीएम शाह ने अब तक विदेशी डिप्लोमैट्स से अकेले मिलने के बजाय राजदूत के साथ मिलकर बातचीत करना पसंद किया है. उन्होंने ऐसी मुलाकातों के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल बनाए रखने की कोशिश की है.
Prime Minister सचिवालय ने पुष्टि की है कि 27 मार्च को ऑफिस संभालने के साढ़े तीन महीने बाद, शाह ने एडीबी अध्यक्ष से मुलाकात की. वह नेपाल के सबसे बड़े बहुपक्षीय विकास साझेदारों में से एक के प्रमुख हैं. वह जापान के विदेश मामलों के वित्त उप-मंत्री रह चुके हैं और हाल ही में एडीबी अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया है.
Prime Minister शाह के सचिव ने एक बयान में कहा कि नेपाल Government और एडीबी के बीच छह दशक पुरानी विकास साझेदारी को मजबूत करने के लिए हुई मीटिंग में, दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की.
Prime Minister शाह की प्रेस और रिसर्च सलाहकार दीपा दहल के अनुसार, आधे घंटे की मीटिंग में Prime Minister ने भरोसा जताया कि नेपाल आने वाले वर्षों में गुड गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी के जरिए डेवलपमेंट का एक नया दौर हासिल करेगा.
सचिवालय ने कहा, “दोनों पक्षों ने नेपाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ के तौर पर हाइड्रोपावर और पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटलाइजेशन और टूरिज्म रोड इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग बढ़ाने पर भी सकारात्मक बातचीत की.”
मीटिंग के दौरान, एडीबी अध्यक्ष कांडा ने नेपाल को विकास सहायता बढ़ाने की प्रतिबद्धता को फिर से कंफर्म किया और कहा कि बैंक देश की आर्थिक विस्तार और खुशहाली में मदद करने के लिए एक दीर्घकालिक विकास साझेदार के तौर पर काम करता रहेगा.
उन्होंने नेपाल की बड़ी आर्थिक क्षमता, मजबूत पब्लिक मैंडेट और युवा लीडरशिप की भी सराहना की और दोहराया कि एडीबी नेपाल के विकास के सफर में उसके साथ खड़ा रहेगा.
इससे पहले Prime Minister शाह ने अमेरिकी राज्य विभाग में दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर और अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत और India में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मिलने की अपील को मना कर दिया था. कुछ हफ्ते पहले भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री का नेपाल का दौरा भी स्थगित कर दिया गया था.
विदेशी राजदूतों के साथ अनौपचारिक मीटिंग करने के पुराने रिवाज को तोड़ते हुए, शाह किससे मिलते हैं, इस पर एक सख्त प्रोटोकॉल लागू कर रहे हैं. इससे कुछ जगहों पर इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या इस तरीके से नेपाल के राष्ट्रीय हित मजबूत होंगे या कमजोर.
पीएम शाह ने 8 अप्रैल को काठमांडू में मौजूद डिप्लोमैट्स के साथ मिलकर बातचीत की. बाद में, 26 मई को, उन्होंने 23 यूरोपीय संघ के राजदूतों और मिशन के उपप्रमुखों के साथ-साथ काठमांडू और New Delhi में मौजूद थाईलैंड, रूस, ऑस्ट्रेलिया, म्यांमार, संयुक्त अरब अमीरात, नॉर्वे, फिनलैंड, मलेशिया और ब्राजील के राजदूतों से मिलकर मुलाकात की.
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि एडीबी अध्यक्ष के साथ शाह की मीटिंग विदेशी मेहमानों के साथ अलग-अलग मीटिंग करने की तरफ एक बड़े बदलाव का इशारा है या नहीं. विदेश नीति के विशेषज्ञों का कहना है कि Prime Minister को किससे मिलना है, इस बारे में फैसला नेपाल के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए, न कि किसी सख्त प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर.
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एबीएम
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