पूर्वोत्तर में सुरक्षा सख्ती के बाद नेपाल की गांजा तस्करी बढ़ी, बिहार बना प्रमुख प्रवेश मार्ग

New Delhi, 2 जुलाई . पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने और गांजे की अवैध खेती पर लगाम लगने के बाद अब तस्करों का नेटवर्क नेपाल की ओर शिफ्ट हो गया है. केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, नेपाल में बड़े पैमाने पर उगाए जा रहे गांजे की तस्करी बिहार के रास्ते India में की जा रही है, जहां से इसे दक्षिण भारत, श्रीलंका और फिर अमेरिका तथा यूरोप जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि Prime Minister Narendra Modi के 2014 में सत्ता संभालने के बाद पूर्वोत्तर राज्यों में विकास के साथ-साथ सीमा सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया. इसके चलते असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में गांजे की अवैध खेती में भारी गिरावट आई. इसके बाद तस्करों ने नेपाल को नया स्रोत बना लिया.

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी इलाकों में उगाया गया गांजा बेहतर गुणवत्ता का होता है, जिसके कारण उसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग रहती है.

जांच एजेंसियों ने नेपाल के सुनसरी जिले को गांजा तस्करी का प्रमुख केंद्र चिह्नित किया है. यहां से गांजा बिहार के अररिया और सुपौल जिलों से लगी खुली भारत-नेपाल सीमा के जरिए India में लाया जाता है. इसके बाद सड़क मार्ग से इसे दक्षिण India भेजा जाता है और वहां से श्रीलंका होते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाता है.

केंद्रीय एजेंसियां और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि भारत-नेपाल की 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा तस्करों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. तस्कर निजी कारों, मोटरसाइकिलों और ट्रकों के जरिए मादक पदार्थों की खेप India में पहुंचाते हैं.

खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों के अनुसार, सीमा पार कराने वाले दलाल (टाउट) इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभाते हैं. ये लोग पैसे लेकर नेपाल से बिहार तक बिना पकड़े लोगों और तस्करी के सामान को पहुंचाने में मदद करते हैं. अधिकारियों का दावा है कि अतीत में इसी नेटवर्क का इस्तेमाल Pakistan से नेपाल पहुंचे आतंकियों को India में दाखिल कराने के लिए भी किया गया था. भारतीय मुजाहिदीन ने भी इस नेटवर्क का इस्तेमाल किया था.

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नेपाल से आने वाली गांजे की खेप Pakistan या ‘गोल्डन ट्राएंगल’ क्षेत्र से आने वाले मादक पदार्थों की तुलना में कम मात्रा में होती है, लेकिन इसकी आवृत्ति काफी अधिक रहती है.

अधिकारियों के मुताबिक, India को नशामुक्त बनाने के लिए केंद्र Government की रणनीति के तहत मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई तेज की गई है. प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट्स पर निगरानी बढ़ाई गई है और लगातार बड़ी कार्रवाई की जा रही है.

अधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी चिंता Pakistan से ड्रोन के जरिए भेजे जा रहे मादक पदार्थ हैं. वहीं, संयुक्त राष्ट्र भी भारत-नेपाल की खुली सीमा को मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी, नकली मुद्रा और हथियारों की तस्करी के लिहाज से संवेदनशील बता चुका है.

भारतीय एजेंसियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश से लगी सीमा का भी इस्तेमाल तस्करी के लिए होता है, लेकिन बिहार का मार्ग तस्करों की पहली पसंद बना हुआ है. नेपाल ने वर्ष 1976 में गांजे की खेती पर प्रतिबंध लगा दिया था, हालांकि समय-समय पर इस प्रतिबंध को हटाने की मांग उठती रही है.

हाल ही में एनसीबी ने नेपाल, India और श्रीलंका में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया था. जांच में पता चला कि काठमांडू से चरस और हैशिश ऑयल को भारत-नेपाल के सोनौली सीमा मार्ग के जरिए India में तस्करी कर लाया जा रहा था.

डीएससी