बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर समझौता संभव नहीं, बाइडेन से मुलाकात फिजूल : रईसी

Ebrahim Raisi, a candidate in Iran’s presidential elections, casts his vote at a polling station in Tehran, Iran Friday, June 18, 2021. Iran began voting Friday in a presidential election tipped in the favor of a hard-line protege of Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei, fueling public apathy and sparking calls for a boycott in the Islamic Republic. (AP Photo/Ebrahim Noroozi)

तेहरान . ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने एक बार फिर बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर अमेरिका को दो टूक जवाब दिया है. रईसी ने कहा वह तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करना चाहते. रईसी ने अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भी मुलाकात नहीं करना चाहते हैं.

इब्राहिम रईसी से जब पूछा गया कि क्या 1988 में करीब पांच हजार लोगों के नरसंहार में वह शामिल थे, तो उन्होंने खुद को ‘मानवाधिकारों का रक्षक’ बताया. रईसी उस तथाकथित ‘मौत के पैनल’ का हिस्सा थे, जिसने 1980 के दशक के अंत में ईरान-इराक युद्ध की समाप्ति के बाद राजनीतिक कैदियों को सजा दी थी. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ सभी प्रतिबंध वापस लेने के लिए अमेरिका बाध्य है.

ईरान के बैलिस्टिक कार्यक्रम और क्षेत्रीय मिलीशिया को उसके समर्थन के बारे में पूछे जाने पर रईसी ने कहा कि इन मुद्दों पर समझौता नहीं हो सकता है. व्हाइट हाउस ने अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं की है. सऊदी अरब और इजराइल जैसे देशों से संतुलन बनाए रखने के लिए ईरान, यमन के हूथी और लेबनान के हिज्बुल्ला जैसे क्षेत्रीय मिलिशया पर भरोसा करता है. तेहरान के पास 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले के लड़ाकू विमान हैं, इसलिए वह क्षेत्रीय अरब पड़ोसियों के खिलाफ मिसाइलों में निवेश कर रहा है. अरब देशों ने पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका से अरबों डॉलर (Dollar) के हथियार खरीदे हैं.

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