एनडीए की ‘मंगल मिलन’ बैठक समाप्त, एनसीपीआई सांसद पहली बार हुए शामिल

New Delhi, 28 जुलाई . Lok Sabha में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पेश किए जाने के एक दिन बाद Tuesday को संसद भवन परिसर की लाइब्रेरी बिल्डिंग (पीएलबी) में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) संसदीय दल की बैठक ‘मंगल मिलन’ हुई.

बैठक में पहली बार, तृणमूल कांग्रेस के पूर्व बागी नेता और अब एनसीपीआई सांसद इस चर्चा में शामिल हो रहे हैं. एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायनी घोष भी इस बैठक में शामिल हुईं, जो पहले तृणमूल कांग्रेस में थीं.

Prime Minister Narendra Modi, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और एनडीए के अन्य सांसदों के साथ जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम में आयोजित बैठक में शामिल हुए. पहुंचे.

एनडीए सदस्यों के बीच यह चर्चा ऐसे समय में बुलाई गई, जब केंद्र Government ‘एंटी-चीटिंग बिल’ (परीक्षा में धोखाधड़ी रोकने वाला बिल) को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है और विपक्ष जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्रों के साथ कथित ‘Police बर्बरता’ के मुद्दे पर Government को घेरने की तैयारी कर रहा है.

Monday को विपक्ष की लगातार जोरदार नारेबाजी के बीच राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने Lok Sabha में यह बिल पेश किया. यह बिल ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करना चाहता है.

इस प्रस्तावित संशोधन का मकसद सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहे. इसकी मुख्य विशेषताओं में सख्त सजा शामिल है, जैसे कि 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, दोषी पाए जाने वालों की संपत्ति जब्त करना और तीन महीने के भीतर फैसला सुनाने के लिए एक व्यवस्था बनाना.

‘मंगल मिलन’ बैठक असल में एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक का ही नया रूप है, जिसका मकसद रचनात्मक बहस और गठबंधन के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा देना है.

संसद सत्र के दौरान रोजाना के कामकाज (फ्लोर मैनेजमेंट) और अलग-अलग पार्टियों के बीच आम सहमति बनाने के अलावा, ‘मंगल मिलन’ बैठक एनडीए के सहयोगी दलों के साथ तालमेल बढ़ाने का जरिया भी है.

यह बैठक एनडीए सांसदों को बहस में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करती है और अहम सहयोगी शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के बीच बोलने की जिम्मेदारियां बांटने में मदद करती है.

ओपी/एएस