झारखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी और झामुमो के बैजनाथ

रांची, 18 जून . Jharkhand से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. Jharkhand मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को जीत हासिल हुई है, वहीं कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रणव झा को पराजय का सामना करना पड़ा.

आधिकारिक तौर पर परिणाम की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन परिमल नाथवानी ने social media पर अपनी जीत की जानकारी देते हुए Prime Minister Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित एनडीए और भाजपा का आभार जताया है.

मतगणना के अनुसार, झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम को 31 और भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी को 28 वोट मिले हैं. उनके पक्ष में गिरे 2 वोट इनवैलिड करार दिए गए. कांग्रेस के प्रणव झा को 21 वोट मिले हैं. उनके पक्ष में किया गया एक वोट कैंसिल किया गया है. इस तरह राज्यसभा की दोनों सीटों पर मुकाबला कर रहे इंडिया गठबंधन और एनडीए समर्थित प्रत्याशी ने एक-एक सीट अपने खाते में दर्ज की.

परिमल नाथवानी ने social media पर लिखा है कि राज्यसभा सदस्य के रूप में चौथी बार सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव और जिम्मेदारी का विषय है. उन्होंने कहा कि Jharkhand से यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा और वर्ष 2008 में इसी राज्य से उनकी संसदीय यात्रा शुरू हुई थी.

नाथवानी ने Prime Minister Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा नेतृत्व और एनडीए के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह Jharkhand के हितों और विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहेंगे. इससे पहले विधानसभा परिसर में हुए मतदान में सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

Chief Minister हेमंत सोरेन समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी प्रमुख नेताओं ने मतदान किया. दिन का अंतिम वोट झामुमो नेता एवं मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने डाला. मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने के बाद देर शाम मतगणना शुरू हुई और परिणाम घोषित किए गए. राज्यसभा चुनाव को लेकर Political हलकों में खास दिलचस्पी थी.

इंडिया गठबंधन ने झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को मैदान में उतारा था, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर परिमल नाथवानी चुनाव लड़ रहे थे. मतदान से पहले दोनों खेमों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए बैठकें और रणनीतिक कवायद भी की थी.

एसएनसी/डीकेपी