पंजाब जनगणना विवाद पर एनसीएससी सख्त, अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर मांगी रिपोर्ट

New Delhi, 19 मई . राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने Tuesday को पंजाब में होने वाली जनगणना प्रक्रिया के दौरान अनुसूचित जातियों की सूची में आपत्तिजनक और अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल से जुड़ी एक शिकायत का गंभीरता से संज्ञान लिया.

यह शिकायत एनसीएससी के अध्यक्ष किशोर मकवाना को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने सौंपी थी.

शिकायत के मुताबिक, जनगणना प्रक्रिया के दौरान वाल्मीकि समुदाय के संदर्भ में अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से समुदाय के सदस्यों में रोष व्याप्त है. आयोग ने इस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की और संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए.

एनसीएससी ने जनगणना कार्य निदेशालय, पंजाब के निदेशक और सामाजिक न्याय, अधिकारिता और अल्पसंख्यक विभाग, पंजाब Government के प्रधान सचिव को 15 दिनों के भीतर ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ जमा करने का आदेश दिया है.

अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि अनुसूचित जातियों के सम्मान, अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि आयोग संबंधित अधिकारियों द्वारा जमा की गई रिपोर्ट और इस मामले में उठाए गए कदमों के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई करेगा.

इससे पहले मार्च में, एनसीएससी ने चंडीगढ़ में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ दो दिवसीय समीक्षा बैठक के बाद पंजाब में अनुसूचित जातियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर भी चिंता जताई थी.

मकवाना ने उस समय कहा था कि पंजाब में अनुसूचित जातियों की स्थिति के लिए ‘तत्काल सुधारात्मक कदमों’ की आवश्यकता है. आयोग ने कई मुद्दों को उजागर किया था, जिनमें छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताएं, केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं का लागू न होना, एससी छात्रों के बीच स्कूल छोड़ने की बढ़ती दरें और अत्याचार निवारण तंत्र में कमियां शामिल थीं.

आयोग ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों को संभालने में हुई चूक की ओर भी इशारा किया था. एनसीएससी के अनुसार, कथित तौर पर कई शिकायतों को Police थानों में बिना First Information Report दर्ज किए ही खारिज कर दिया गया था.

एएसएच/डीकेपी