
New Delhi, 16 अप्रैल . नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने नेवी हाउस New Delhi में ‘सागर मंथन’ का आयोजन किया. यहां हुए संवाद के दौरान स्टार्टअप, एमएसएमई, देश के शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के सहयोग से एक सशक्त, समावेशी और चुस्त नवाचार तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया.
यहां बताया गया कि यह तंत्र इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि रक्षा क्षमताओं का निर्माण तेज और प्रभावी ढंग से किया जा सके. साथ ही, रक्षा अनुसंधान के दायरे को विस्तारित करने और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को मजबूत करने के लिए सुधारों और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को अपनाने पर भी सहमति बनी. इस महत्वपूर्ण संवाद का उद्देश्य ‘इरादे से क्षमता’ की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित करना रहा. इस महत्वपूर्ण संवाद में नौसेना के शीर्ष नेतृत्व के साथ नीति आयोग, सशस्त्र सेवाओं, उद्योग जगत और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
गौरतलब है कि New Delhi में नौसेना कमांडर्स कांफ्रेंस भी चल रही है. इसी कांफ्रेंस के साइडलाइंस में नौसेना का यह मंथन हुआ. इस बैठक में बदलते वैश्विक भू-Political परिदृश्य और तेजी से विकसित हो रही तकनीकों पर चर्चा की गई. ऐसी परिस्थितियों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया. चर्चा का केंद्र उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ाकर रक्षा क्षमताओं के विकास को गति देना रहा. ‘सागर मंथन’ विचार-विमर्श में कई महत्वपूर्ण और दूरदर्शी सुझाव सामने आए. यहां ऐसे सुझाव दिए गए जो रक्षा क्षेत्र में उद्योग की गहरी भागीदारी और भविष्य के लिए तैयार रक्षा तंत्र के निर्माण की दिशा में सहायक हो सकते हैं. यह पहल रक्षा क्षेत्र में ‘इरादे को क्षमता में बदलने’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक इससे तेज, स्मार्ट और बड़े स्तर पर परिणाम हासिल किए जा सकेंगे.
गौरतलब है कि भारतीय नौसेना की कमांडर्स कांफ्रेंस दिल्ली में 14 अप्रैल से शुरू हुई है. इस कमांडर्स कांफ्रेंस में नौसेना प्रमुख के अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ भी शामिल हुए. यहां नौसेना के कमांडर्स मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में समुद्री सुरक्षा, ऑपरेशनल तैयारियों और राष्ट्रीय हितों के लिए रणनीतिक तय कर रहे हैं. इसमें नौसेना का शीर्ष नेतृत्व, ऑपरेशनल कमांडर और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं.
यहां नौसेना प्रमुख ने बताया था कि भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस क्षेत्र में नौसेना के युद्धपोतों की तैनाती ने भारतीय नाविकों और समुद्री व्यापार को सुरक्षा का भरोसा दिया है. उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और उसके कारण समुद्री यातायात पर पड़ने वाले प्रभावों को गंभीर चुनौती बताया है.
नौसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि इस वर्ष 15 से अधिक स्वदेशी प्लेटफॉर्म को नौसेना मे शामिल करने की योजना है. यहां एडमिरल त्रिपाठी ने वैश्विक शक्ति संतुलन में तेजी से आए बदलावों पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि बीते पांच वर्षों में दुनिया प्रतिस्पर्धा के दौर से निकलकर संघर्ष के दौर में प्रवेश कर चुकी है.
उन्होंने बताया कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि इन युद्धों में आर्थिक दबाव, तकनीकी बढ़त और ‘नैरेटिव वारफेयर’ जैसी अवधारणाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
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जीसीबी/एसके
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