राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: विजय चिंतकायला ने पीएम मोदी को मंगलगिरी शॉल भेंट किया

New Delhi / हैदराबाद, 7 अगस्त . India की समृद्ध हथकरघा परंपरा का जश्न मनाने वाले दिन आंध्र प्रदेश के मशहूर मंगलगिरी हथकरघा उत्पाद को देश के सर्वोच्च Political कार्यालय में जगह मिली. राज्यसभा सांसद विजय चिंतकायला ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर Prime Minister Narendra Modi को हाथ से बुना हुआ पारंपरिक शॉल भेंट किया. इस मुलाकात के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे.

यह कदम Prime Minister Narendra Modi के राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के संदेश के अनुरूप था, जिसमें उन्होंने India के बुनकरों और कारीगरों को श्रद्धांजलि दी और ग्रामीण सशक्तिकरण, महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने वाले हथकरघा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता को दोहराया.

Prime Minister को मंगलगीरी हथकरघा शॉल भेंट करके, विजय चिंतकायला ने इस राष्ट्रीय उत्सव को देश के नेतृत्व के सामने आंध्र प्रदेश की सबसे मशहूर पारंपरिक बुनाई कलाओं में से एक को प्रदर्शित करने के अवसर में बदल दिया.

अपनी खास कारीगरी और जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) स्टेटस के लिए मशहूर मंगलगिरी हैंडलूम कुशल कारीगरों की कई पीढ़ियों की कला को दर्शाता है, जिनका काम India की सबसे पुरानी बुनाई परंपराओं में से एक को बचाए हुए है.

यह कदम Chief Minister एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश Government के स्थानीय हैंडलूम को बढ़ावा देने पर लगातार ध्यान देने को भी दिखाता है. कारीगरों की आर्थिक सुरक्षा, बाजार तक पहुंच और उन्हें पहचान दिलाने के मकसद से शुरू की गई पहलों के जरिए, Government ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाते हुए हैंडलूम सेक्टर को मजबूत करने की कोशिश की है.

बातचीत के बाद विजय चिंतकायला ने कहा कि नेशनल हैंडलूम डे पर Prime Minister Narendra Modi को मंगलगिरी हैंडलूम शॉल भेंट करना उन सभी बुनकरों को सम्मान देने जैसा था जिनकी कारीगरी हमारी विरासत को जिंदा रखती है. यह सम्मान आंध्र प्रदेश के कारीगर समुदाय का है.

यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री और मंगलगिरी से विधायक नारा लोकेश की लगातार कोशिशों को भी दिखाता है, जो मंगलगिरी हैंडलूम को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने ‘नेथान्नाकु सेवा’ योजना जैसी पहल शुरू की है, जिसके तहत हैंडलूम बुनकर परिवारों को सालाना 25,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है. साथ ही, उन्होंने बुनकरों के लिए एक खास स्कूल बनवाया है और इलाके की समृद्ध बुनाई विरासत को बचाने और बढ़ावा देने के लिए लगातार कोशिशें की हैं.

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