नरीमन ने देशद्रोह कानून को रद्द करने और यूएपीए के कुछ हिस्सों को खत्म करने का कहा

नई दिल्ली (New Delhi) . सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के रिटायर्ड जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने देशद्रोह कानून को रद्द करने और यूएपीए कानून के भी कुछ हिस्सों को रद्द करने की मांग. विश्वनाथ पसायत स्मृति समिति द्वारा आयोजित एक समारोह में जस्टिस आरएफ नरीमन ने अपने भाषण में कहा कि ”मैं सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से आग्रह करूंगा कि वह उसके सामने लंबित देशद्रोह कानून के मामलों को वापस केंद्र के पास न भेजे. सरकारें आएंगी और जाएंगी, अदालत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपनी शक्ति का उपयोग करे और धारा 124 ए और यूएपीए के कुछ हिस्सों को खत्म करे, फिर यहां के नागरिक ज्यादा खुलकर सांस लेंगे.”

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा कि वैश्विक कानून सूचकांक में भारत की रैंक 142 है क्योंकि कठोर और औपनिवेशिक कानून अभी भी मौजूद हैं. नरीमन ने यूके और भारत में देशद्रोह कानून के इतिहास के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि हमारे चीन और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुए थे, उसके बाद ये औपनिवेशिक कानून, गैरकानूनी गतिविधि निषेध अधिनियम आदि बनाए गए.

उन्होंने कहा कि “इमिनेंट लॉलेस एक्शन, वर्तमान में इस्तेमाल किया जाने वाला एक मानक है जिसे यूनाइटेड स्टेट्स सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) द्वारा ब्रैंडेनबर्ग बनाम ओहियो (1969) में स्थापित किया गया था. यूएपीए अंग्रेजों का कानून है क्योंकि इसमें कोई अग्रिम जमानत नहीं है और इसमें न्यूनतम 5 साल की कैद है. यह कानून अभी जांच के दायरे में नहीं है. इसे भी देशद्रोह कानून के साथ देखा जाना चाहिए.”

Check Also

टीसी लेने गई छात्रा को शिक्षक ने गलत तरीके से छुआ : दोस्ती करने, संबंध बनाने की बात भी कही

जालौर (Jalore) . राजस्थान (Rajasthan) में सरकारी स्कूलों में छात्राओं से छेड़छाड़ के मामले बढ़ते …