
कोलकाता, 17 अगस्त . सेना की पूर्वी कमान की स्पीयर कोर ने एक विशेष अभियान के तहत Monday को नागालैंड के पुंगलवा स्थित सैनिक स्कूल में मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के खिलाफ सामूहिक टीकाकरण अभियान चलाया.
अभियान के दौरान कोर की एक विशेष चिकित्सा टीम ने 678 छात्रों और कर्मचारियों का टीकाकरण किया.
इस प्रक्रिया में चिकित्सा जांच, परामर्श और टीकाकरण के बाद की निगरानी शामिल थी. कोर ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया रिपोर्ट नहीं की गई.
यह पहल नागालैंड के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इस महीने की शुरुआत में राज्य भर के सभी आवासीय स्कूलों, छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों को मेनिंगोकोकल रोग के लक्षणों के प्रति सतर्क रहने के लिए जारी की गई सलाह के बाद की गई है.
यह एडवाइजरी 14 वर्षीय लड़के में मेनिंगोकोकल रोग के संदिग्ध मामले के बाद जारी की गई थी. बच्चे को 2 अगस्त को सीएचआईएसआर अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) में भर्ती कराया गया था.
उसे बुखार, उल्टी, लो ब्लड प्रेशर (हाइपोटेंशन), होश में बदलाव और शरीर की असामान्य मुद्रा (एबनॉर्मल पोस्चरिंग) जैसे लक्षण थे, जो बाद में तेजी से फैलने वाले त्वचा के घावों (स्किन लीजन्स) में बदल गए.
विभाग ने बताया कि बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे इनवेसिव मैकेनिकल वेंटिलेशन, वासोएक्टिव सपोर्ट और गहन देखभाल दी जा रही है.
विभाग ने बताया कि बच्चा अभी भी गंभीर रूप से बीमार है और उसे इनवेसिव मैकेनिकल वेंटिलेशन, वैसोएक्टिव सपोर्ट और इंटेंसिव केयर दी जा रही है.
बच्चे का इलाज क्लिनिकल लक्षणों के आधार पर अभी सेप्टिक शॉक और पुरपुरा फुलमिनन्स के तौर पर किया जा रहा है, और इनवेसिव मेनिंगोकोकल बीमारी (मेनिन्गोकोकेमिया) का संदेह है. माइक्रोबायोलॉजिकल पुष्टि का इंतजार है.
हालांकि, यह बीमारी आम नहीं है, लेकिन हॉस्टल और डॉरमेट्री जैसी जगहों पर एक-दूसरे के करीब रहने वाले लोगों के बीच यह तेजी से फैल सकती है. एडवाइजरी में कहा गया है कि बीमारी को फैलने से रोकने के लिए शुरुआती पहचान, तुरंत रिपोर्टिंग और तत्काल सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई जरूरी है.
मेनिंगोकोकल बीमारी ‘नीसेरिया मेनिन्जाइटिडिस’ बैक्टीरिया के कारण होती है. यह मेनिनजाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर की झिल्लियों का संक्रमण) या सेप्टिसीमिया (खून का संक्रमण) के रूप में हो सकती है. Government ने कहा कि अगर समय पर इलाज न किया जाए तो दोनों ही स्थितियां जानलेवा हो सकती हैं.
एडवाइजरी के मुताबिक, यह बीमारी सांस की बूंदों (रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स) और लंबे समय तक करीबी संपर्क से फैलती है, जिसमें खांसना, छींकना, या खाने के बर्तन, पानी की बोतलें और सिगरेट साझा करना शामिल है. इसमें छात्रों, स्टाफ, हॉस्टल वॉर्डन और हेल्थकेयर देने वालों से कहा गया है कि वे इन लक्षणों पर नजर रखें. इसमें अचानक तेज बुखार, सिर में तेज दर्द, गर्दन में अकड़न, उल्टी, रोशनी से परेशानी, सुस्ती या उलझन, दौरे पड़ना, लाल-बैंगनी रंग के चकत्ते (जो दबाने पर भी नहीं मिटते), और गंभीर मामलों में हाथ-पैर ठंडे पड़ना या शॉक के लक्षण दिखना.
एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अगर किसी में ये लक्षण दिखें तो उसे तुरंत मेडिकल जांच और इलाज के लिए नजदीकी हेल्थ सेंटर भेजा जाना चाहिए. सैनिक स्कूल के छात्र और स्टाफ अब अगले कुछ सालों तक इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित हैं.
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एएसएच/डीकेपी
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