काम करने का मेरा जज्बा मेरी आखिरी सांस तक जारी रहेगा, पद्म श्री सम्मान मिलने पर बोले डॉ. एचवी हांडे

New Delhi, 25 मई . President द्रौपदी मुर्मु ने President भवन में डॉ. एचवी हांडे को चिकित्सा क्षेत्र में उनके योगदान के सम्मान में पद्म श्री से सम्मानित किया. इस सम्मान के मिलने पर डॉ. एचवी. हांडे ने आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि पद्म समिति ने मेरे काम को सराहा है, जिससे मुझे बेहद संतुष्टि मिली है. डॉ. एचवी. हांडे ने ये भी कहा कि काम करने का मेरा जज्बा मेरी आखिरी सांस तक जारी रहेगा.

New Delhi में से बातचीत में डॉ. एचवी. हांडे ने कहा, मैं डॉ. एचवी हांडे हूं. वी का मतलब वेंकट रमना है. मेरी मूल भाषा कन्नड़ है, लेकिन मैंने ज्यादातर पढ़ाई आंध्र प्रदेश और अन्य जगहों पर की, क्योंकि मेरे पिता सरकारी डॉक्टर थे. फिर मैंने तमिल भाषा में महारत हासिल की और ‘कंबरामादम’ का अंग्रेजी गद्य में अनुवाद किया. यही मेरी पृष्ठभूमि है.”

चिकित्सा क्षेत्र में अपने लंबे सफर के बारे में बताते हुए डॉ. हांडे ने कहा कि मैंने 1950 में अपना चिकित्सा अभ्यास शुरू किया था. अब इसे 76 साल हो चुके हैं. इस दौरान मैं छह बार विधानसभा और तीन बार विधान परिषद सदस्य चुना गया. मैं दो बार स्वास्थ्य मंत्री भी रहा. मैं हमेशा अपने क्लिनिक जाता था और वहां आने वाले हर मरीज का इलाज करता था, चाहे वे फीस दे सकें या नहीं. कई लोगों का मैंने मुफ्त इलाज किया. यह सिलसिला आज भी जारी है. हमारा अपना अस्पताल है, जहां मेरा बेटा विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में काम करता है. आज भी मैं हर दिन वहां तीन घंटे बैठकर मरीजों को देखता हूं. जो कोई भी मुफ्त इलाज चाहता है, वह आ सकता है.

डॉ. हांडे ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि 1950 में प्रैक्टिस शुरू करने वाला आज कोई और डॉक्टर जीवित हो और अभी भी नियमित प्रैक्टिस कर रहा हो.

स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि दिवंगत एमजीआर के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए मैंने कई महत्वपूर्ण काम किए. जब मैंने पद संभाला, तब तमिलनाडु में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार 110 थी और मातृ मृत्यु दर भी बहुत अधिक थी. साढ़े छह साल के अंदर मैंने शिशु मृत्यु दर को घटाकर प्रति हजार 30 कर दिया.

उस समय कुष्ठ रोग बहुत फैला हुआ था और कुष्ठ आश्रम मरीजों से भरे हुए थे. मैंने छात्रों की मदद से, जांच-पड़ताल और अन्य उपायों से इस समस्या का सामना किया. जब मैंने पद छोड़ा, तब कुष्ठ आश्रम पूरी तरह खाली हो चुके थे. वहां एक भी मरीज नहीं बचा था.

उन्होंने कहा कि अस्पतालों के निरीक्षण के लिए मैंने एक ‘मास्टर प्लान’ बनाया, जो पहले कभी नहीं हुआ था. मैंने हर जिले के आईएएस अधिकारियों (कलेक्टर्स) को प्रेरित किया. उनकी मदद से पूरे राज्य में चिकित्सा निरीक्षण की गुणवत्ता देश में सर्वश्रेष्ठ हो गई. तीन साल के अंदर हमने चिकित्सा से जुड़े सभी पैमानों को शीर्ष श्रेणी में ला खड़ा किया.

इस उपलब्धि के लिए उन्हें तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और बाद में Prime Minister पीवी नरसिम्हा राव द्वारा पांच करोड़ रुपए का पुरस्कार दिया गया. वर्ष 1985 में उन्हें डॉ. बीसी रॉय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.

बिहार से कला के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित बिश्वा बंधु की पत्नी इंदु देवी ने कहा कि Government ने उनके योगदान को पहचाना. हम सभी बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं. हम भावुक भी महसूस कर रहे हैं, हमारी आंखें खुशी के आंसुओं से भर गई हैं. पूरा परिवार बहुत खुश है, गर्व महसूस कर रहा है और हम Government के आभारी हैं. Government को पूरे परिवार ने धन्यवाद दिया है.

डीकेएम/