‘मेरा सपना ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है’, प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने के बाद बोलीं रितु मंडल

Ahmedabad, 7 जून . पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के एक छोटे से गांव के राजमिस्त्री की बेटी रितु मंडल ने Ahmedabad में आयोजित प्रथम वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है. 20 साल की रितु के इस प्रदर्शन ने उन्हें ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने और पदक जीतने के उनके सपने के और करीब ला दिया है. रितु सफलता उनके सालों की कड़ी मेहनत, त्याग और दृढ़ संकल्प का नतीजा है.

रितु प्रदर्शन के देखने के लिए उनके माता-पिता और बड़े भाई Ahmedabad में मौजूद थे. जब उन्होंने रितु को कंधों पर तिरंगा लपेटकर अपनी जीत का जश्न मनाते देखा, तो वे भावुक हो गए. यह समय रितु के लिए भी बेहद भावुक था.

रितु ने साई मीडिया से बातचीत में कहा, “मेरे पिता मेसन (राजमिस्त्री) का काम करते हैं. आर्थिक तंगी के बावजूद मेरे परिवार ने हमेशा मेरे सपनों का साथ दिया. मैंने सालों तक योगासन का प्रशिक्षण लिया और कड़ा अभ्यास किया. मेरी उम्र के दूसरे लोग अलग-अलग काम कर रहे थे. मेरे सामने चुनौतियां थीं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी. मुझे अपने लक्ष्य पर भरोसा था.”

उन्होंने कहा, “मेरे भाई को योगासन से बहुत लगाव है और वह चाहते हैं कि मैं इस खेल में सबसे ऊंचाई तक पहुंचूं. शायद इसलिए क्योंकि वह खुद योगासन एथलीट थे लेकिन हालात की वजह से आगे नहीं बढ़ पाए. वह मुझमें काबिलियत देखते हैं और मुझे बेहतर करने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं.”

रितु ने मुस्कराते हुए कहा, “मेरे भाई ने मुझसे कभी नहीं कहा कि ‘तुम सबसे अच्छी एथलीट हो’ या ‘तुम परफेक्ट हो.’ अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी वे मुझसे कहते हैं, ‘बहुत बढ़िया, लेकिन अभी भी सुधार की गुंजाइश है. सुधार करती रहो. तुम्हें अभी बहुत आगे जाना है.’ उनकी यही बात मुझे बहुत अच्छी लगती है. वे मेरे लिए हमेशा अच्छा चाहते हैं. उनका सपना है कि मैं India का प्रतिनिधित्व करूं और सबसे ऊंचे स्तर पर मेडल जीतूं.”

इसके अलावा, रितु ने अपने माता-पिता के सहयोग और त्याग को अपनी सफलता का श्रेय दिया.

वर्ल्ड स्टेज पर अपनी पहचान बनाने से पहले, रितु नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर चुकी थीं. उन्होंने चेन्नई में ‘खेलो इंडिया यूथ गेम्स’ और असम में ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ दोनों में कांस्य पदक जीते. इन प्रदर्शनों से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने का आत्मविश्वास मिला. Ahmedabad में उन्होंने दिखाया कि वे कितनी आगे आ चुकी हैं. दुनिया भर के बेहतरीन योगासन एथलीट्स का सामना करते हुए, रितु ने शानदार प्रदर्शन किया. संतुलन, लचीलापन, ताकत और सटीकता का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्होंने दो स्वर्ण पदक जीते. वे ‘वर्ल्ड योगासन चैंपियनशिप’ में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गईं.

Ahmedabad में मिली बड़ी कामयाबी के बावजूद रितु का मानना ​​है कि उनका सफर अभी शुरू हुआ है. उन्होंने कहा, “मैं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में India का प्रतिनिधित्व करती रहना चाहती हूं. मेरा सपना है कि योगासन को एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और आखिरकार ओलंपिक्स में शामिल किया जाए. India के लिए ओलंपिक मेडल जीतना मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है.”

पीएके