
नई दिल्ली, 19 मई . उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़कों पर नमाज न पढ़ने के बयान पर सियासत तेज हो गई है. जहां भाजपा नेता सीएम के बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं. मुस्लिम धर्मगुरु ने भी सीएम के बयान का समर्थन किया है.
उत्तर प्रदेश के शाही मुख्य मुफ्ती, मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने Chief Minister योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनका यह बयान इस्लामी सिद्धांतों और अदालती आदेशों के अनुरूप है, क्योंकि सार्वजनिक सड़कें प्रार्थना के लिए नहीं होतीं.
उन्होंने आगे कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ का यह बयान है कि सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाती, जोकि बिल्कुल सही है. इस मामले पर हाई कोर्ट के आदेश पहले ही जारी हो चुके हैं. यह बात जगजाहिर है कि सड़कों पर नमाज अदा नहीं की जाती. इस्लाम में इस बात का जिक्र है कि कोई ऐसी जगह जहां से विवाद पैदा हो, सार्वजनिक हो, वहां पर नमाज नहीं पढ़नी है.
मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने Chief Minister योगी आदित्यनाथ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “Government दिशा-निर्देश जारी करती है. पीएम मोदी के मार्गदर्शन में Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया है. हम सभी को Government द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए. इसके अलावा, समाज को विकास की ओर ले जाना निस्संदेह हम सभी का साझा एजेंडा होना चाहिए.
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अल्पसंख्यक समाज के विकास के लिए जो वादा किया है, उस पर खरा उतरने के लिए अलग-अलग राज्य काम कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश Government के मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सड़कें लोगों के चलने के लिए होती हैं. अगर सड़कों पर कब्जा कर लिया जाएगा तो आवागमन बाधित होगा. सड़कें चलने के लिए हैं और नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद है. मुसलमानों को मस्जिद में नमाज पढ़ना चाहिए.
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एएसएच/डीकेपी
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