
Mumbai , 24 जून ( .) Mumbai क्राइम ब्रांच की यूनिट 12 ने एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो असली Police से भी तेज रफ्तार में चोरी के मोबाइल ढूंढ निकालता था. हालांकि उसका यह परोपकार कोई समाजसेवा नहीं बल्कि अवैध वसूली और धोखाधड़ी का बड़ा जरिया था. आरोपी खुद को क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर संजय बताकर लोगों को डराता था और मोबाइल ढूंढने के बदले फोन की कीमत का 20 प्रतिशत तक कमीशन वसूलता था. Police का अनुमान है कि उसने अब तक 200 से अधिक लोगों को उनके खोए हुए मोबाइल वापस दिलाए हैं और उनसे कमीशन वसूला है.
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि जोगेश्वरी वेस्ट का रहने वाला हनजमा मुबारक पाशा सैयद (30) नाम का व्यक्ति फर्जी Policeवाला बनकर मोबाइल रिकवरी का नेटवर्क चला रहा है. सटीक इनपुट के आधार पर Police ने जोगेश्वरी वेस्ट में एक पेट्रोल पंप के पास जाल बिछाया और सैयद को धर दबोच लिया. सैयद के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनमें 30 अलग-अलग मोबाइलों के स्क्रीनशॉट मिले हैं.
Police जांच में सामने आया कि सैयद इंस्टाग्राम पर सेलिफर नाम से एक अकाउंट चलाता था, जहां वह खोए हुए मोबाइल रिकवर करने का विज्ञापन देता था. जिन लोगों के फोन चोरी हो जाते थे, वे इस विज्ञापन को देखकर उससे संपर्क करते थे. कुछ मामलों में वह खुद भी ऑनलाइन पीड़ितों से संपर्क साधता था.
सैयद सबसे पहले पीड़ित से मोबाइल का आईएमईआई नंबर लेता था. एडवांस्ड तकनीकी टूल्स और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर हेल्पलाइन की मदद से वह पता लगा लेता था कि उस हैंडसेट में फिलहाल कौन सा सिम कार्ड एक्टिव है. उसका साथी गौरव परिहार नए यूजर को एक खरीदार बनकर फोन करता था और बातों-बातों में उसका नाम-पता हासिल कर लेता था. गौरव फिलहाल फरार है और Mumbai से बाहर है.
पूरी डिटेल मिलने के बाद सैयद इंस्पेक्टर संजय बनकर नए यूजर को फोन करता था. वह उसे कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर फोन सरेंडर करने का दबाव बनाता था. डर के मारे जब नया यूजर फोन सौंप देता था, तो सैयद उसे असली मालिक को लौटा देता था. इसके बदले वह मालिक से फोन की कुल कीमत का 15 से 20 फीसदी हिस्सा (लगभग 10,000 से 25,000 रुपये) फीस के रूप में लेता था.
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों का कहना है कि भले ही इस नेटवर्क ने कई लोगों के फोन वापस दिलाए हों, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया अवैध थी. इसमें फर्जीवाड़ा, डेटा का अनधिकृत इस्तेमाल और जबरन वसूली शामिल है. Police अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि आरोपी के पास टेलीकॉम कंपनियों या मोबाइल इकोसिस्टम के संवेदनशील डेटा तक पहुंच कैसे बनी? क्या इसमें किसी टेलीकॉम कंपनी के कर्मचारी की मिलीभगत है? मामले की आगे की जांच जारी है.
–
ओपी/पीएम
Skip to content