
New Delhi, 21 जुलाई . सांसद विजय कुमार उर्फ विजय वसंत ने Lok Sabha में स्थगन प्रस्ताव लाने की अनुमति मांगी है. विजय कुमार ने पत्र में लिखा, “मैं तत्काल सार्वजनिक महत्व के एक मामले पर चर्चा करने के लिए स्थगन प्रस्ताव की सूचना देना चाहता हूं. यह मामला देश भर में बार-बार परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक होने, कल संसद के पास विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ Police कार्रवाई, राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और गृह मंत्री द्वारा बयान देने की अनुमति न दिए जाने के कारण संसद के दोनों सदनों के समय से पहले स्थगित होने से उत्पन्न हुआ है.”
उन्होंने कहा, “परीक्षा और भर्ती परीक्षाओं के प्रश्न-पत्रों का बार-बार लीक होना एक राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुका है. इसने उन लाखों छात्रों और नौकरी के उम्मीदवारों का भरोसा डगमगा दिया है जो शिक्षा और रोजगार पाने के लिए वर्षों तक कड़ी मेहनत, त्याग और उम्मीद के साथ प्रयास करते हैं. सार्वजनिक आरोपों में कहा गया है कि मौजूदा Government के कार्यकाल के दौरान 152 परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक हुए हैं. यदि यह सच है, तो ये बार-बार की विफलताएं केवल अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता की रक्षा करने में एक प्रणालीगत विफलता को दर्शाती हैं. इसके नतीजे बहुत बुरे हैं.”
उन्होंने कहा, “हर लीक हुआ पेपर ईमानदार छात्रों का भरोसा तोड़ता है, भर्ती में देरी करता है, परिवारों पर आर्थिक बोझ डालता है और पूरी पीढ़ी के लिए अनिश्चितता बढ़ाता है. रिपोर्टों में इस संकट को तमिलनाडु में पांच युवाओं की दुखद मौत से भी जोड़ा गया है, जो परीक्षा की तैयारी करने वालों पर पड़ने वाले भारी भावनात्मक और सामाजिक असर को दिखाता है. India के युवाओं के भविष्य के साथ ऐसी बेरुखी नहीं बरती जा सकती. कल, छात्र और बेरोजगार युवा शांतिपूर्ण तरीके से अपना दुख जाहिर करने और जवाबदेही की मांग करने के लिए संसद के पास जमा हुए. उनकी चिंताओं पर ध्यान देने के बजाय, अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ Police कार्रवाई की. इंटरनेट सेवाएं बंद करने से बातचीत में और रुकावट आई और लोकतांत्रिक विरोध को संभालने के तरीके पर गंभीर चिंताएं पैदा हुईं. इन घटनाओं ने आम जनता में व्यापक चिंता पैदा की है और इस पर तुरंत संसदीय जांच की जरूरत है.”
सांसद विजय कुमार ने लिखा, “उतनी ही चिंताजनक बात यह थी कि Government ने इन घटनाओं पर गृह मंत्री का बयान होने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही समय से पहले स्थगित करनी पड़ी. संसद लोकतांत्रिक जवाबदेही का सबसे बड़ा मंच है और लाखों युवा भारतीयों के भविष्य पर असर डालने वाले मामलों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि चुप्पी साधी जानी चाहिए. ऐसे समय में जब परीक्षा के पेपर लीक होने से लाखों छात्रों के सपने बार-बार टूटे हैं, देश को नेतृत्व, जवाबदेही, पारदर्शिता और ठोस कार्रवाई की उम्मीद थी. इसके बजाय, सिर्फ चुप्पी है. परीक्षा प्रणाली की बार-बार की विफलताएं कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ये शासन-व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी को दिखाती हैं.”
सांसद ने कहा, “शिक्षा मंत्रालय अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता, खासकर तब जब India के युवाओं का भविष्य खतरे में हो. मंत्रिस्तरीय जिम्मेदारी संसदीय लोकतंत्र का एक बुनियादी सिद्धांत है. इसलिए, विपक्ष शिक्षा मंत्री से इन बार-बार की विफलताओं के लिए नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने और पद छोड़ने की मांग करता है, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके और परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी में जनता का भरोसा बहाल हो सके. हमारे बच्चों का भविष्य बिकने के लिए नहीं है. उनके सपनों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, धोखा नहीं. उनकी काबिलियत को अवसर मिलना चाहिए, भ्रष्टाचार नहीं. सदन को India के युवाओं के हित में कदम उठाना चाहिए. इसलिए, मैं यह स्थगन प्रस्ताव पेश करने के लिए सदन की अनुमति चाहता हूं.”
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ओपी/पीएम
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