राजस्थान के विशेष अवैध शराब विरोधी अभियान में 600 से अधिक मामले दर्ज

jaipur, 6 मई . Rajasthan एक्साइज डिपार्टमेंट ने एक्साइज कमिश्नर नमित मेहता के निर्देशानुसार एक विशेष निवारक अभियान के माध्यम से राज्य भर में शराब के अवैध निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है.

1 मई से 5 मई तक चलाए गए इस अभियान के परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर जब्ती, कच्चे माल का विनाश, और कई गिरफ्तारियां हुईं.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अभियान के दौरान कुल 633 मामले दर्ज किए गए, जबकि अवैध शराब गतिविधियों के संबंध में 172 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया.

प्रवर्तन टीमों ने एक चार पहिया वाहन और आठ दो पहिया वाहनों सहित नौ वाहन भी जब्त किए.

अभियान के दौरान अधिकारियों ने 8.52 लाख रुपए मूल्य की 3,169 लीटर देसी शराब, 7.96 लाख रुपए मूल्य की 798 लीटर भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल), 2.62 लाख रुपए मूल्य की 1,199.45 लीटर बीयर और 3,698.5 लीटर अवैध रूप से निर्मित शराब जब्त की.

महत्वपूर्ण बात यह है कि अवैध शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल ‘वॉश’ को विभिन्न जिलों में 140,402 लीटर नष्ट किया गया. जीरो टॉलरेंस का रुख अपनाते हुए उत्पाद शुल्क निवारक टीमों ने पूरे राज्य में समन्वित छापे, गश्त और नाकाबंदी अभियान चलाए.

उदयपुर में अधिकारियों ने भारी मात्रा में बीयर जब्त की और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि गोगुंडा और खेरवाड़ा में टीमों ने बड़ी मात्रा में अवैध शराब और अन्य अवैध शराब को नष्ट कर दिया.

चित्तौड़गढ़ जिले में व्यापक छापेमारी के परिणामस्वरूप हजारों शराब की थैलियां और बोतलें बरामद हुईं, साथ ही अवैध शराब बनाने के संयंत्रों को भी नष्ट कर दिया गया.

बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, हनुमानगढ़, अलवर, बीकानेर, झालावाड़, जोधपुर, बाड़मेर, भरतपुर, डीग, दौसा और अजमेर से भी इसी तरह की कार्रवाई की सूचना मिली, जहां प्रवर्तन टीमों ने वॉश को नष्ट कर दिया, अवैध शराब जब्त की और कई मामले दर्ज किए.

भरतपुर और डीग में ही 11,000 लीटर से अधिक अपशिष्ट जल और कई आसवन इकाइयों को नष्ट कर दिया गया, जबकि दौसा में छापेमारी के परिणामस्वरूप 4,500 लीटर अपशिष्ट जल नष्ट हो गया.

इस अभियान के दौरान अजमेर में 36 मामले दर्ज किए गए और 14 गिरफ्तारियां हुईं.

अधिकारियों ने कहा कि राज्य में अवैध शराब व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए क्षेत्रीय और जिला स्तरीय आबकारी टीमों द्वारा निरंतर निगरानी, सख्त प्रवर्तन और समन्वित कार्रवाई की जा रही है.

विभाग ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कड़ी निगरानी बनाए रखने और उत्पाद शुल्क कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया.

डीकेपी/