
New Delhi, 2 अगस्त . उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होगा. सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष ने इसकी अवधि बढ़ाने की मांग उठाई है. विपक्ष का कहना है कि प्रदेश के सामने कई गंभीर मुद्दे हैं, जिन पर महज कुछ दिनों में व्यापक चर्चा संभव नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भरोसा दिलाया कि नियमों के तहत विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा.
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा, “विपक्ष जिस भी विषय पर नियमों के तहत नोटिस देगा, उसे अपनी बात रखने का पूरा समय दिया जाएगा. किसी के समय में कटौती नहीं की जाएगी. विपक्ष का अपना एजेंडा, विचार और नीति है, उस पर उन्हें पूरी स्वतंत्रता से बोलने का अवसर मिलेगा. Government का दायित्व है कि वह विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब दे. विपक्ष को भी लोकतांत्रिक मूल्यों और सदन की मर्यादा का पालन करते हुए अपनी बात रखनी चाहिए.”
कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा, “आज मानसून सत्र के पहले सर्वदलीय बैठक हुई, कार्यमंत्रणा की बैठक हुई और उस बैठक में हमारे नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधानमंडल दल की ओर से सबसे पहले तो हमने Government के सामने ये प्रस्ताव रखा कि ये बहुत ही कम समय अवधि की सदन में होने जा रही है. हम सब जानते हैं उत्तर प्रदेश में आज ऐसे कितने गंभीर मुद्दे हैं, जिसके ऊपर चर्चा होनी आवश्यक है.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि हम सदन में चर्चा चाहते हैं, लेकिन Government हमारे सुझावों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती. इसी वजह से कई बार सदन में व्यवधान की स्थिति बनती है. हम बिजली संकट, बेरोजगारी, स्कूलों के बंद होने और किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं. Government का रवैया सहयोगात्मक होना चाहिए.
उत्तर प्रदेश Government में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि Government मानसून सत्र के लिए पूरी तरह तैयार है.
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास सवाल हैं तो उन्हें सदन में उठाना चाहिए. Government हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन यदि विपक्ष हंगामा करता है, बहिष्कार करता है या बार-बार व्यवधान डालता है, तो इसका मतलब है कि उसके पास चर्चा के लिए ठोस मुद्दे नहीं हैं.
Samajwadi Party के विधायक रविदास मल्होत्रा ने कहा कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश की समस्याओं पर तीन दिन के सत्र में चर्चा संभव नहीं है. उन्होंने मांग की कि मानसून सत्र कम से कम 10 दिनों का होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सपा राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले को भी सदन में उठाएगी और इसकी जांच हाईकोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग करेगी.
वहीं, सपा विधायक मोहम्मद फहीम, तूफानी सरोज सहित अन्य विधायकों ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में बैठक होगी. बैठक में यह तय किया जाएगा कि मानसून सत्र के दौरान पार्टी किन प्रमुख मुद्दों को सदन में उठाएगी.
–
डीकेएम/
Skip to content