महिला आरक्षण की आड़ में जातिगत जनगणना से बचना चाहती है मोदी सरकार: कांग्रेस

New Delhi, 13 अप्रैल . कांग्रेस का आरोप है कि मोदी Government महिला आरक्षण के पीछे छुपकर ‘शकुनी चाल’ चल रही है, ताकि वह देश में गलत परिसीमन कर सके और उसे जातिगत जनगणना न करानी पड़े.

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान social media एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के लेख का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन के जरिए छोटे और परिवार नियोजन के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले राज्यों को पूर्ण या तुलनात्मक रूप से कोई नुकसान नहीं होना चाहिए. लेकिन मोदी Government जनगणना के आंकड़ों के बिना जो परिसीमन करने जा रही है, वह गलत तरीका होने के साथ-साथ खतरनाक है. इससे उत्तर-दक्षिण राज्यों के बीच विभाजन भी पैदा होगा. उन्होंने कहा कि परिसीमन का मतलब सिर्फ सीटें बढ़ाना नहीं है, बल्कि न्यायसंगत प्रतिनिधित्व देना है.

उन्होंने कहा कि 2011 में आखिरी जनगणना हुई थी और फिर 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन यह पांच साल पीछे चल रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि बिना जनगणना के आंकड़ों के परिसीमन कैसे किया जा सकता है? जिन-जिन राज्यों में एसआईआर हो रहा है, वहां लाखों-करोड़ों लोगों के नाम कटे हैं, यानी Government मान रही है कि अलग-अलग जगहों पर जनसंख्या के आंकड़े बदल रहे हैं. ऐसे में किस आधार पर परिसीमन किया जाएगा? Government कैसे फैसला लेगी कि एससी-एसटी आरक्षित सीटें कौन सी होंगी? उन्होंने पूछा कि जनगणना के पूरे आंकड़े अगले साल 2027 तक उपलब्ध हो जाएंगे, तो Government तब तक इंतजार क्यों नहीं कर सकती.

उन्होंने कहा कि बिहार और तेलंगाना में हुए जातिगत सर्वे बताते हैं कि पिछड़े वर्ग की जनसंख्या कितनी अधिक है और इसी आधार पर कांग्रेस पार्टी ने 2023 में महिला आरक्षण बिल पारित होते समय कहा था कि ओबीसी महिलाओं के लिए भी आरक्षण दिया जाए. लेकिन जातिगत जनगणना कराने और ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने से बचने के लिए मोदी Government परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात कर रही है.

श्रीनेत ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनाव प्रचार के बीच 16 अप्रैल से संसद के विशेष सत्र बुलाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि Government चुनावों में इसका Political लाभ लेने की कोशिश कर रही है और सांसदों से जनता के बीच जाकर प्रचार करने का हक छीना जा रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मोदी Government को तीन-तीन पत्र लिखे और 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाकर संविधान संशोधन पर चर्चा कराए जाने की मांग की थी. लेकिन Government ने यह बात नहीं मानी, क्योंकि उसकी मंशा में खोट है और उसका इरादा महिला सशक्तिकरण नहीं है.

श्रीनेत ने कहा कि 30 महीने पहले सितंबर, 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था, जिसमें महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और परिसीमन की शर्त रखी गई थी. उस समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्पष्ट कहा था कि बिना किसी शर्त के इसे 2024 से ही इसे लागू किया जाए, लेकिन Government ने यह बात नहीं मानी. उन्होंने सवाल उठाया कि 30 महीने बाद Prime Minister Narendra Modi को क्या हुआ कि उनकी ही Government ने 2023 के कानून में जो शर्तें लगाई थीं, अब उन्हीं को बदलने की तैयारी की जा रही है.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सोनिया गांधी ने अपने लेख में साफ लिखा है कि महिला आरक्षण तो मुद्दा ही नहीं है, वह पहले ही संसद में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है; असली मुद्दा परिसीमन है. श्रीनेत ने Government की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह महिला आरक्षण के पीछे छिपकर गलत परिसीमन करना चाहती है और राहुल गांधी द्वारा उठाई गई जातिगत जनगणना की मांग से भाग रही है.

उन्होंने याद दिलाया कि मोदी Government ने Supreme Court में हलफनामा देकर कहा था कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए. यहां तक कि Narendra Modi ने कहा था कि अर्बन नक्सल की सोच वाले लोग जातिगत जनगणना कराना चाहते हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता ने तीखे सवाल पूछे कि जिन मुद्दों के लिए 16 अप्रैल से विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, क्या उन पर चर्चा हाल ही में खत्म हुए सत्र में नहीं हो सकती थी?

उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद एपस्टीन फाइल्स, विफल विदेश नीति, बेरोजगारी और महंगाई पर होने वाली चर्चाओं से बचने के लिए मोदी Government महिला आरक्षण के पीछे छुपकर देश को उलझाने की चाल चल रही है.

सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी याद दिलाया कि महिला आरक्षण की नींव डालने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया था. उन्होंने कहा कि पंचायती राज में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण कांग्रेस की Government ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए दिया था, जिसके जनक राजीव गांधी थे. इसी की बदौलत आज पंचायती राज में 15 लाख से ज्यादा निर्वाचित महिलाएं हैं.

कांग्रेस प्रवक्ता ने पार्टी की मांग दोहराई कि मोदी Government सभी दलों की बैठक बुलाए और व्यापक चर्चा के बाद ही कोई निर्णय ले.

एमएस/