
चेन्नई, 5 मई . तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने Chief Minister पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा Governor राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को भेज दिया.
Governor राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने Chief Minister एम.के. स्टालिन और उनके मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. साथ ही उन्होंने स्टालिन से नई Government के गठन तक कार्यवाहक Chief Minister के रूप में पद पर बने रहने का अनुरोध किया है.
Tuesday को लोक भवन से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, Governor ने संवैधानिक परंपरा के तहत स्टालिन से तब तक कार्यभार संभालने को कहा है, जब तक नई Government शपथ नहीं ले लेती.
स्टालिन का इस्तीफा हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में डीएमके नीत सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) को मिली करारी हार के बाद आया है. सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि गठबंधन बहुमत से काफी पीछे रह गया है, उसके तुरंत बाद इस्तीफा Governor को सौंप दिया गया.
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके गठबंधन को केवल 73 सीटें मिलीं, जो बहुमत के 118 के आंकड़े से काफी कम है. डीएमके ने 164 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वह लगभग 60 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी, जिससे पार्टी को विपक्ष में बैठना पड़ा.
चुनाव में स्टालिन को व्यक्तिगत तौर पर भी बड़ा झटका लगा है. वे 2011 से प्रतिनिधित्व कर रहे अपनी पारंपरिक कोलाथुर सीट से चुनाव हार गए. उन्हें तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने पराजित किया.
तमिलनाडु में किसी मौजूदा Chief Minister की चुनावी हार का यह दुर्लभ उदाहरण है. इससे पहले 1996 में पूर्व Chief Minister जे. जयललिता को भी हार का सामना करना पड़ा था.
वी.एस. बाबू की जीत को Political रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह पहले डीएमके से जुड़े रहे हैं. उनकी जीत राज्य में मतदाताओं के बदलते रुझान और Political परिदृश्य में बदलाव का संकेत देती है.
इस चुनाव में Actor-राजनेता विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेत्री कझगम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि वह बहुमत से दूर है. ऐसे में राज्य में Government गठन को लेकर Political गतिविधियां तेज हो गई हैं.
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डीएससी
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